सिंगरौली:कोयला मंत्रालय ने पर्यावरण के अनुकूल भूमिगत खनन को बढ़ावा देने की पहल की है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2030-35 के बीच कोयले की मांग चरम पर पहुंचेगी, ऐसे में अंडरग्राउंड माइनिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगी।
यह तकनीक वन क्षेत्रों को प्रभावित किए बिना खनन की सुविधा देती है, जिससे भूमि और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही, ध्वनि और जल प्रदूषण भी न्यूनतम होता है। सिंगरौली में कई नई भूमिगत परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जो ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन में सहायक होंगी।
