भारतीय शहरों के जलवायु अनुकूल विकास के लिए निजी क्षेत्र को निवेश बढ़ाने की जरूरत : विश्व बैंक

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (वार्ता) भारतीय शहरों की आबादी अगले 25 साल में दोगुनी होकर 95.1 करोड़ पर और वर्ष 2070 तक एक अरब 10 करोड़ पर पहुँच जायेगी। विश्व बैंक के मुताबिक इन शहरों के जलवायु अनुकूल विकास के लिए करीब 11 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत है जिसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ानी अनिवार्य है।
विश्व बैंक ने मंगलवार को ‘भारत में मजबूत और समृद्ध शहरों की ओर’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। इसमें शहरी बाढ़ और बढ़ते तापमान समेत जलवायु तथा बुनियादी ढाँचों के जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई है और उपाय सुझाये गये हैं।
विश्व बैंक के भारत में निदेशक ओगुस्ते क्वामे ने यहाँ रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शहरों में बाढ़ और लू की घटनायें बढ़ रही हैं। शहरों को इन मौसमी परिस्थितियों के लिए मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश में शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में बुनियादी ढाँचे में निजी क्षेत्र का निवेश महज पाँच प्रतिशत है जिसे काफी अधिक बढ़ाने की जरूरत है।
विश्व बैंक का अनुमान है कि देश में पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास के लिए वर्ष 2050 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर और 2070 तक 10.9 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत है।
श्री क्वामे ने कहा कि सरकार अकेले इस काम को पूरा नहीं कर सकती। इसके लिए निजी सरकारी सहभागिता या कोई अन्य मॉडल अपनाया जा सकता है। निजी कंपनियों को इक्विटी और ऋण देकर प्रोत्साहित किया जा सकता है। शहरी निकाय भी अपने स्तर पर पूँजी जुटा सकते हैं।
देश के 20 शहरों के साल 1985 से 2015 के आँकड़ों के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान 10 बड़े शहरों में तापमान में चिंताजनक वृद्धि के मामले 71 प्रतिशत बढ़ गये। रिपोर्ट की सह-लेखिका अस्मिता तिवारी ने बताया कि चेन्नई और सूरत में रात का तापमान आसपास के गैर-शहरी इलाकों की तुलना में तीन-चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है। लखनऊ में रात का तापमान नजदीकी क्षेत्रों के मुकाबले पाँच डिग्री ऐसा सेल्सियस तक अधिक रहता है। कंक्रीट के ढाँचों में बेतहाशा वृद्धि के कारण ऐसा हुआ है। वैश्विक स्तर पर साल 2050 तक गर्मी से जुड़ी मौते के मामले दोगुने से भी अधिक होकर 3,28,500 पर पहुँच जायेंगे।
भारी बारिश के बाद बनने वाली स्थानीय बाढ़ या शहरी बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन, नदियों के तटीय इलाकों के संरक्षण और समय पर चेतावनी जारी करने और त्वरित प्रतिक्रिया की सलाह दी गयी है।
अहमदाबाद के म्युनिसिपल कमिश्नर बंछा निधि पाणि ने बताया कि शहर में साल 2013 में हीट एक्शन प्लान जारी किया गया था। इससे हर साल 2,318 लोगों की जान बच रही है। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने घरों और इमारतों की छतों को सफेद रंग से पेंट करने की पहल शुरू की। इससे रात के तापमान में करीब तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गयी है।
श्री क्वामे ने बताया कि केंद्र सरकार स्वयं इस दिशा में पहल कर रही है। एक साल पहले सरकार ने दो विषयों पर विश्व बैंक से संपर्क किया था। इसमें एक नये हब शहरों के विकास के बारे में है जैसे आँध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती। दूसरा विषय, मौजूदा शहरों में सृजनात्मक बदलाव के बारे में है ताकि दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों के विकसित बनाया जा सके।
उन्होंने स्थानीय प्रशासन की स्वायत्तता की वकालत करते हुये कहा कि भारत में जिन शहरों को जितनी ज्यादा स्वायत्तता दी गयी है उनका प्रदर्शन उतना अच्छा रहा है। नीतियाँ स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बननी चाहिये। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में निजी क्षेत्र इस बात को समझेगा कि पर्यावरण अनुकूल शहरों के विकास उसके लिए भी समान रूप से लाभदायक है और उम्मीद जतायी कि निजी कंपनियाँ इसमें निवेश बढ़ायेंगी।
रिपोर्ट में मौसम के हिसाब से कार्यालयों के समय में परिवर्तन, शहरों में हरियाली बढ़ाने, ठंडी छतों, छतों पर सौर पैनल लगाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सिफारिश की गयी है।

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