
जबलपुर। मेडिकल कोर्स करने के बाद एक साल तक बांड की शर्त अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में सेवा प्रदान करने नियुक्ति दिये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि नियमों के संशोधन कर तीन माह में नियुक्ति प्रदान करने की समय सीमा को समाप्त कर दिया गया है। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अमित सेठ की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता डॉ जॉली सिन्हा तथा अविनाश कुमार की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि न्यूरो सर्जरी में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स (एमसीएच) करने के लिए एक साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा प्रदान करने का बांड उनकी तरफ से भरा गया था। बांड की शर्तों का पालन नहीं करने पर दस लाख रूपये जुर्माना के तौर पर अदा करना होगे। कोर्स पूर्ण किये हुए एक साल से अधिक का समय गुजर जाने के बाद नियुक्ति आदेश जारी किया गया है। निर्धारित नियम के अनुसार कोर्स पूर्ण करने के बाद तीन माह में नियुक्ति प्रदान करने का प्रावधान था। निर्धारित समय अवधि में नियुक्ति प्रदान नहीं करने पर बांड स्वतः समाप्त हो जाता है।
सरकार की तरफ से बताया गया कि पूर्व के नियम में संशोधन करते हुए तीन माह की समय सीमा हटा दिया गया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से स्वीकार किया गया कि संशोधित नियम पर पर प्रभावशील होते है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
