मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर देश का सबसे स्वच्छ शहर बनकर उभरा है. यह लगातार आठवीं बार है जब इंदौर ने ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जो इसकी असाधारण प्रतिबद्धता और नागरिक सहभागिता का प्रमाण है. ‘सुपर स्वच्छ लीग’ में सर्वाधिक अंक प्राप्त करना इस बात का सूचक है कि इंदौर ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन बना दिया है, जिसे अब पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है.
इस बार का पुरस्कार समारोह भी दिल्ली में हुआ, जहां इंदौर नगर निगम और प्रशासन की टीम ने यह गौरव प्राप्त किया. स्थानीय शासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया. यह न केवल इंदौर के लिए बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है.
यह उपलब्धि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व को भी दर्शाती है. प्रदेश सरकार के स्थानीय शासन मंत्रालय को मजबूत करने और स्वच्छता अभियान को प्राथमिकता देने से ही ऐसे परिणाम संभव हो पाए हैं. इंदौर की सफलता बताती है कि जब सरकार, प्रशासन और नागरिक एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. मध्य प्रदेश के अन्य शहर जैसे उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, बुधनी और ग्वालियर को भी विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिलना इस बात का प्रमाण है कि इंदौर द्वारा स्थापित स्वच्छता के प्रतिमानों का सकारात्मक प्रभाव पूरे प्रदेश पर पड़ रहा है. बहरहाल, भविष्य में, इंदौर के लिए चुनौतियाँ बढऩे वाली हैं. ‘सुपर लीग’ में शामिल होने के कारण, इंदौर को अब न केवल पूर्व की भांति अपनी स्वच्छता बनाए रखनी होगी, बल्कि उसे एक अन्य ‘बी’ श्रेणी के शहर को भी स्वच्छता में आगे लाने की जिम्मेदारी दी जाएगी. अगले सर्वेक्षण में इस दूसरे शहर को मिलने वाले अंक भी इंदौर के खाते में जुड़ेंगे. यह एक कठिन चुनौती है, लेकिन इंदौर के अधिकारी इसके लिए तैयार हैं. इंदौर ने पहले भी कई शहरों को स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग और सुझाव दिए हैं, और बदले हुए नियमों के तहत अब इस पहल को औपचारिक मान्यता मिल जाएगी. यह एक बेहतरीन कदम है जो देश भर में स्वच्छता के स्तर को ऊपर उठाने में मदद करेगा.
हालांकि, इस शानदार सफलता के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान देना आवश्यक है और वह है वाहन प्रदूषण से मुक्ति. इंदौर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वच्छता में उत्कृष्ट मानक स्थापित किए हैं, लेकिन यातायात वाहनों से निकलने वाला धुआं अभी भी एक चिंता का विषय है. वायु प्रदूषण न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि शहर की समग्र गुणवत्ता को भी कम करता है.
इसलिए, इंदौर को अपनी अगली चुनौती के रूप में यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करना, साइकिलिंग के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करना और नागरिकों को पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं. जिस तरह इंदौर ने स्वच्छता को एक आंदोलन बनाया है, उसी तरह वायु प्रदूषण से मुक्ति भी एक जन अभियान बन सकती है.
इंदौर ने हमें दिखाया है कि प्रतिबद्धता और सहयोग से क्या हासिल किया जा सकता है. अब समय आ गया है कि यह शहर स्वच्छता के साथ-साथ स्वच्छ हवा के क्षेत्र में भी एक नया प्रतिमान स्थापित करे. इंदौर की यात्रा प्रेरणादायक है, और यह देश के अन्य शहरों के लिए एक मार्गदर्शक बनी रहेगी. हालांकि इंदौर को अब समग्र रूप से आदर्श शहर बनना चाहिए. बहरहाल, इंदौर की इस सफलता के लिए सभी जिम्मेदारों को बधाई.
