मॉस्को/कीव, 16 जुलाई (वार्ता) रूस ने यूक्रेन युद्धविराम पर सहमति के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 50 दिनों के अल्टीमेटम को खारिज करते हुए अमेरिका की “कड़े टैरिफ” लगाए जाने की धमकी को अस्वीकार्य करार दिया।
रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने मंगलवार को ज़ोर देकर कहा कि उनका देश यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक समाधान का पक्षधर है और बातचीत के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा ” यदि इसका उचित जवाब नहीं मिलता है और राजनयिक स्तर पर इससे कोई लक्ष्य हासिल नहीं होता है तो हमारा विशेष सैन्य अभियान जारी रहेगा।”
उन्होंने कहा कि रूस अपनी बात पर अडिग है और हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन ( नाटो) इसे गंभीरता से लेंगे।
श्री ट्रंप ने मंगलवार को उन आरोपों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने यूक्रेन को रूसी क्षेत्रों में घुसकर हमला करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने कहा कि वह इस संघर्ष में किसी का पक्ष नहीं ले रहे हैं और उन्होंने यूक्रेन को केवल यह सलाह दी कि उसे लंबी दूरी के हथियारों से “रूस को निशाना नहीं बनाना चाहिए”।
गौरतलब है कि इस स्पष्टीकरण से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका नाटो के ज़रिए यूक्रेन को हथियार भेजेगा और 50 दिनों में युद्धविराम समझौता न होने पर रूस पर “कड़े टैरिफ” भी लगाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पैट्रियट मिसाइल प्रणालियाँ “कुछ ही दिनों में” यूक्रेन पहुँच सकती हैं। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने भी साफ किया कि श्री ट्रंप का 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का मतलब “आर्थिक प्रतिबंध” से ही है।
इस बीच रूसी विदेश मंत्रालय ने हथियारों की आपूर्ति की निंदा करते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि नाटो देश शांति में रुचि नहीं रखते। उधर यूक्रेन की संसद ने मंगलवार को देश की युद्धकालीन स्थिति और सैन्य लामबंदी को पांच नवंबर यानि 90 दिनों तक बढ़ाने के लिए मतदान किया।
सांसदों ने ओटावा कन्वेंशन से अस्थायी रूप से हटने को भी मंजूरी दी जो एक अंतरराष्ट्रीय संधि है और सैनिकों के खिलाफ बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाती है।

