नई दिल्ली 04 जुलाई (वार्ता) सेना उप प्रमुख (सीडी एंड एस) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने सशस्त्र बलों को आज और भविष्य के युद्धों को देखते हुए तैयार रहने तथा ड्रोन जैसे हथियारों और प्रौद्योगिकी से लैस होने के लिए एक विशेष इको-सिस्टम विकसित करने की जरूरत पर बल दिया है।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने शुक्रवार को यहां भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा ‘नए युग की सैन्य प्रौद्योगिकी’ विषय पर आयोजित सम्मेलन सह प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को प्रौद्योगिकी और नवाचार पर आधारित आज और भविष्य के युद्धों तथा परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस सीमित युद्ध से कई सबक लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान लड़ाई भले ही एक सीमा पर चल रही थी लेकिन दुश्मन एक से अधिक थे। वह इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान को चीन और तुर्किए जैसे देशों से मिले परोक्ष सहयोग का उल्लेख कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय सेनाओं की गतिविधियों के बारे में निरंतर जानकारी दी जा रही थी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन के अधिकाधिक इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सेनाओं को ड्रोन के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए और इसके उत्पादन तथा परीक्षण के लिए एक इको-सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन दोहरे उपयोग की तकनीक है। उन्होंने कहा, “ हम रक्षा मंत्रालय और अन्य के साथ एक रूपरेखा तैयार करने के लिए परामर्श कर रहे हैं और सितंबर या अक्टूबर तक हमें अपना ड्रोन फ्रेमवर्क तैयार कर लेना चाहिए, जिसमें हम इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि उत्पादन को कैसे प्रोत्साहित किया जाए, कमजोरियों को कैसे दूर किया जाए और परीक्षण को कैसे सुविधाजनक बनाया जाए, यह इस रूपरेखा का मूल विषय होगा।”
सेना उप प्रमुख ने कहा कि भारत का वर्ष 2047 तक एक विकसित देश बनने का सपना है और विकसित भारत का मतलब 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा करना है। उन्होंने कहा, “ यह तभी संभव है जब उद्योग आगे बढ़ेंगे। यह तभी संभव है जब हमारे सशस्त्र बल राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक सुरक्षित माहौल बनायेंगे।”
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और सबक का उल्लेख करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने उद्योग से अनुसंधान और विकास, खासकर घटक स्तर के अनुसंधान और विकास पर अधिक निवेश करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है और जहां तक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उनकी आपूर्ति का सवाल है, बंधना नहीं चाहिए। भारत को सभी तरह के युद्ध के लिए तैयार रहने की जरूरत है। भारतीय सशस्त्र बलों को आज और भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें विभिन्न तरह की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का जोर रहता है।”
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि उद्योग को मुनाफे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए लेकिन गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “ उद्योग को समयसीमा का पालन करना चाहिए। सहयोग तथा प्रतिस्पर्धा ठीक है लेकिन शिकायत से बचा जाना चाहिए। हमें युद्ध लड़ने के लिए तैयार रहना होगा और केवल सैनिक ही युद्ध नहीं जीत सकते। सैनिक और उद्योग दोनों का एक साथ चलना है।”
उन्होंने उद्योग जगत से और अधिक परीक्षण सुविधाएं बनाने की भी सिफारिश की और कहा कि सशस्त्र बलों तथा उद्योग दोनों को इस दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।

