कमिश्नरी सिस्टम की पोल खुली, बाणगंगा-लसूड़िया में अपराध बेकाबू, नए थाने फाइलों में दबे

इंदौर:तीन साल पहले बड़े दावों के साथ शहर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुआ था. उम्मीद थी कि ज़ोन, रेंज और स्पेशल यूनिट के जरिए अपराध पर लगाम कसेगी. लेकिन 2025 के आधे पड़ाव पर भी बाणगंगा और लसूड़िया जैसे थानों में हर महीने दर्ज हो रहे सैकड़ों केस इस सिस्टम की हकीकत सामने ला रहे हैं.जनवरी से मई तक सिर्फ इन दो थानों में 1361 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. यानी हर दिन औसतन नौ केस वो भी तब, जब दोनों थानों के क्षेत्रफल और आबादी पिछले पांच साल में दोगुने हो चुके हैं.

हालात इतने बिगड़े कि दो साल पहले सुपर कॉरिडोर थाना और महालक्ष्मीनगर थाना खोलने के प्रस्ताव बने. लेकिन वे प्रस्ताव अब तक टेबल से आगे नहीं बढ़ सके. बाणगंगा और लसूड़िया के अलावा चंदननगर (540), भंवरकुआं (560), खजराना (440), विजयनगर (420), राजेंद्रनगर (418) और आजादनगर (400) थाने भी अपराध के हॉटस्पॉट बने हुए हैं. ये आठ थाने ही शहर के कुल मामलों का बड़ा हिस्सा समेटे हुए हैं. सवाल यह है कि क्या इतने बढ़ते केसों के बीच पुराने ढांचे पर भरोसा किया जा सकता है.

शहर के परंपरागत व्यावसायिक क्षेत्रों सराफा (60 केस), पंढरीनाथ (65), छोटी ग्वालटोली (90), सदर बाजार (126) और रावजी बाजार (127) में अपराध की दर स्थिर है. यानी जहां पुलिस का दखल सीमित लेकिन क्षेत्र नियंत्रित है, वहां हालात संतुलन में हैं. अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि नए थानों को लेकर प्रस्ताव तो लंबे समय से तैयार हैं, लेकिन स्टाफ की कमी, फंडिंग अड़चन और अफसरों की प्राथमिकताओं में इस दिशा को जगह नहीं मिल रही. कमिश्नर सिस्टम की कागजी ताकत ज़मीनी हकीकत में बिखरती दिख रही है.
बस रही नई कॉलोनियां
कमिश्नरी सिस्टम शहर के लिए बड़ा बदलाव था, लेकिन तीन साल बाद भी जिस तरह अपराध एक ही हिस्से में सघनता से टिके हुए हैं, उससे ये सवाल उठना लाज़िमी है क्या ढांचा बदलने से ही सिस्टम बदल जाता है. वहीं एक वरिष्ठ पुलिस अधकिारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारी मांग लंबे समय से लंबित है. सुपर कॉरिडोर पर नई कॉलोनियां हर महीने बस रही हैं, लेकिन थाना वही पुराना. अपराध बढ़ना तय है.

टॉप 8 थानेः जनवरी-मई 2025 (अपराध संख्या)
1. बाणगंगा 721
2. लसूड़िया 640
3. भंवरकुआं 560
4. चंदननगर 540
5. खजराना 440
6. विजयनगर 420
7. राजेंद्रनगर 418
8. आजादनगर 400

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