पेड़ों की कटाई से तपेगा पचमढ़ी, समस्याओं पर अब तो हो ध्यान

( पुनीत दुबे) पचमढी।सतपुडा नेशनल पार्क में आने वाले पचमढी में इन दिनों चल रहे निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध हो और पेडों की कटाई की जगह पेडों को लगाये जाने के लिये पहल होनी चाहिए. नहीं तो पचमढी का तापमान भी सामान्य शहरों की श्रेणी मे आ जाएगा. मप्र में वन क्षेत्र लगभग 95 लाख हेक्टेयर है. इसमें बिगडे वनों का क्षेत्रफल 37 लाख हेक्टेयर है. रिजर्व फारेस्ट में आने के कारण न तो यहां पौधे लगाये जाते हैं और न ही काटे जाने का प्रावधान है. उलट बात करें तो पेड तो कटते ही रहते हैं निजी भूमियों पर भी निर्माण कार्य सौ प्रतिशत तेजी से चल रहे हैं और वहां पर पेडों की कटाई भी अंधाधुंध तरीके से की जा रही है. यदि हम अब भी नहीं चेते तो विशेषज्ञो की माने तो पचमढी के सरकारी एवं प्रायवेट होटलों एवं मकानों में 80 प्रतिशत ए.सी. लगे हुए हैं. इससे यह पता चलता है कि आने वाले वर्षों में यहां का तापमान और बढते चला जाएगा.

निर्माण करने वालों के विरूद्ध लेने होंगे कठोर निर्णय -पचमढी में आये दिन नये नये निर्माण कार्य चल रहे हैं. उन पर लगाम लगाने के लिये प्रशासन को कठोर निर्णय लेकर कार्यवाही करना पडेगा. तभी पचमढी की ठंडकता तो बरकरार रखा जा सकेगा.

निर्माण कार्यों के लिये मटकुली एवं पगारा में प्रशासन को अनुमति देना चाहिए -सूत्र बताते हैं कि मटकुली और प गारा में कई निजी भूमि पर रेस्टारेंट और रिसोर्ट का निर्माण हो चुका है, आगे भी करने के लिये यह स्थान सबसे अच्छा बताया जाता है.

सेना के लोगों ने पेड काटे नहीं, लगाये हैं – सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल एच.के.दुबे ने बताया कि सैनिक शिक्षा कोर के सभी विभागों मे जो भी जमीन है उस पर सेना के लोगों द्वारा पौधे लगाये जाते हैं, काटने के लिये कोई आदेश नहीं मिलता है. हम पचमढी की भौगोलिक स्थिति से छेडछाड नहीं करना चाहते, उसे जिंदा रखने के लिये हमारी सेना के सभी अधिकारी कर्मचारी प्रतिबद्ध हैं.

स्टाप डेम बनाकर पानी रोकना चाहिए – पचमढी में बारिश भी अच्छी होती है इस कारण और अधिक स्टाप डेम बनाकर पानी को रोकना चाहिए. जिससे पेड पौधों की हरियाली को कायम रखा जा सकेगा.

रिजर्व फारेस्ट में पेड काटना और लगाना दोनो प्रतिबंधित है – पचमढी का जितना भी क्षेत्र रिजर्व फारेस्ट में आता है उसमें हम पेड काटना और पेड लगाना दोनो प्रतिबंधित हैं. लेकिन निजी भूमि पर जो निर्माण कार्य कर रहे हैं वे अंधाधुंध तरीकों से वर्षों पुराने पेडों को काट रहे हैं इस पर प्रशासन को कार्यवाही करना चाहिए.

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