नयी दिल्ली, 16 मई (वार्ता) फ्रांस में भारत के पूर्व राजदूत जावेद अशरफ ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान शत्रुता के बारे में पश्चिमी मीडिया की कवरेज में एक “बड़ी कहानी” उभर कर सामने आई है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने के बारे में मनगढ़ंत कहानियों को ‘वाणिज्यिक हितों’ के कारण प्रसारित किया है।
वर्ष 2023 में फ्रांस में राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की देखरेख कर चुके श्री अशरफ ने अंग्रेज़ी अखबार ‘द स्टेट्समैन’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “वास्तव में तथ्यों के सामने आने का इंतजार किए बिना, एंग्लो-सैक्सन मीडिया से स्पष्ट रूप से यह बड़ी कहानी प्रसारित की कि कैसे पाकिस्तानी वायु सेना ने भारतीय वायु सेना को हराया”
उन्होंने कहा, “याद रखें, यह एक आख्यान है जो उन्होंने प्रस्तुत किया है और मैंने देखा है कि एंग्लो-सैक्सन, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटिश मीडिया में इसने कितना जोर पकड़ा है। इस पर मेरा मानना है कि यह मुद्दा बहुत कुछ वाणिज्यिक हितों से जुड़ा है। वे विशेष रूप से एक विमान को लक्षित कर रहे थे और ऐसा इसलिए है क्योंकि वे विभिन्न बाजारों के लिए उस विमान से एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा देखते हैं।”
उन्होंने भारत द्वारा राफेल लड़ाकू जेट विमानों की खरीद का जिक्र करते हुए यह बात कही है। हालांकि बाद में उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में यह पुन: स्पष्ट किया कि वह युद्ध, ऑपरेशन या किसी विमान पर टिप्पणी नहीं कर रहे थे, बल्कि पश्चिम में चल रही कहानी पर टिप्पणी कर रहे थे। बस शुरुआती कवरेज मुख्य रूप से इस पहलू पर था, न कि आतंकी ठिकानों पर हमलों पर।
उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल को भारत ने भारतीय नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर में अपनी नौसेना की उपस्थिति को मजबूत करना है। 630 अरब रुपये (7.4 अरब डॉलर) के सौदे के हिस्से के रूप में, भारत फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर राफेल खरीदेगा। विमान की डिलीवरी 2030 तक पूरी होनी है। पैकेज में हथियार, सिमुलेटर, चालक दल का प्रशिक्षण और पांच साल का प्रदर्शन-आधारित रसद सहायता कार्यक्रम भी शामिल है, साथ ही भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता के प्रयास का समर्थन करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी शामिल है। भारत ने 2022 में व्यापक परीक्षणों के बाद, अमेरिका निर्मित एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट की जगह राफेल एम का चयन किया।
भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल विमानाें की खरीद भारत द्वारा वायुसेना के लिए 36 राफेल खरीदे जाने के लगभग एक दशक की जा रही है। वायुसेना के लिए सरकार और डसॉल्ट के बीच हस्ताक्षरित एक सौदे के तहत 2020 और 2022 के बीच राफेल की खरीद की गयी थी।
भारत ने अमेरिकी विमानन दिग्गज लॉकहीड मार्टिन और बोइंग की जगह फ्रांसीसी राफेल को चुना है, जिन्होंने भारतीय सेना में शामिल किए जाने के लिए क्रमशः अपने लड़ाकू जेट विमानों – एफ-16 और एफ/ए-18 के लिए बहुत आक्रामक रूप से सौदा हासिल करने का प्रयास किया था। स्वीडिश निर्माता साब ने भी अपने ग्रिपेन लड़ाकू जेट के लिए जोरदार कोशिश की थी, जिसे भारतीय वायुसेना द्वारा अपने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) अधिग्रहण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में चुना जाना था।
डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित, राफेल एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है जो हवाई रक्षा, टोही और हमला मिशनों में सक्षम है। यह फ्रांस की परमाणु निवारक क्षमता का भी हिस्सा है। फ्रांसीसी नौसेना ने 2004 से ही वाहक-आधारित राफेल का संचालन किया है। फ्रांस की सेना वर्तमान में 165 राफेल का संचालन करती है, जिसमें 41 वाहक संस्करण शामिल हैं। वर्ष 2015 से, राफेल को फ्रांस के निर्यात बाज़ार में सफलता हासिल हुई है, जिसके 285 विमान कतर, मिस्र, यूनान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और क्रोएशिया सहित देशों को बेचे गए हैं।
पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी वायु सेना द्वारा भारतीय वायु सेना के कम से कम तीन राफेल जेट को मार गिराने की कहानियाँ चलाई थीं, जिसकी भारत ने न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है, सिवाय इसके कि उसके सभी लड़ाकू पायलट सुरक्षित वापस आ गए हैं।
