उज्जैन: महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ के पहले दो नए रेलवे स्टेशन मिलने वाले थे, लेकिन टेंडर और ड्राइंग-डिजाइन की देरी के चलते यह प्रोजेक्ट फिलहाल ठप हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में वर्चुअली भूमि पूजन किया था, लेकिन अब यह निर्माण सिंहस्थ 2028 के बाद ही संभव होगा। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते 500 करोड़ की परियोजना पर खतरा मंडरा रहा है। अन्य सभी स्टेशनों पर काम जारी है, लेकिन उज्जैन पिछड़ गया है।
राजौरा ने कहा था जरूरी है निर्माण
प्रयागराज में भगदड़ की घटना के बाद उज्जैन में दो दिन तक एसीएस डॉ. राजेश राजौरा ने भीड़ प्रबंधन को लेकर सिंहस्थ की तैयारियों का मैदानी स्तर पर जायजा लिया था. इसके आधार पर एसीएस ने रेलवे अधिकारियों के समक्ष इस बात पर चिंता जताई है कि रेल से उज्जैन आने वाली भीड़ का स्टेशन पर प्रबंधन बहुत जरूरी है. वर्तमान में स्टेशन पर वैसी पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं. दो नए स्टेशन बनाए जाने पर तब भी मोहर लगाई गई थी.
इनका कहना है
टेंडर व ड्राइंग डिजाइन को लेकर कुछ दिक्कतें आई हैं. मैं अभी बाहर हूं. अधिकारियों से चर्चा करके बता पाऊंगा. हम भी सिर्फ कयास ही लगा रहे हैं कि रेलवे के नवनिर्माण सिंहस्थ के पहले होंगे या बाद में होंगे.
खेमराज मीणा, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के पीआरओ
