
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मप्र हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरने की मांग की गई थी।
जबलपुर निवासी डॉ. एमए खान व अधिवक्ता उत्तम चौकसे की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 20 पद खाली पड़े हैं। इनमें से 6 जज इसी साल सेवानिवृत्त हो जाएंगे। दलील दी गई कि हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का बोझ बढऩे का एक कारण जजों के रिक्त पद भी है। तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने सुभाष शर्मा विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया के प्रकरण में यह दिशा निर्देश दिए थे कि मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए कि एक जज सेवानिवृत्त हो तो तत्काल दूसरे की नियुक्ति हो जाए। प्रत्येक न्यायाधीश के संबंध में यह पता होता है कि वह कब रिटायर होगा। इसके लिए 6 माह पहले से ही रिक्त पद भरने की कार्रवाई शुरू कर दी जानी चाहिए। लगातार मुकदमों की संख्या बढऩे से कई लोगों को न्याय मिलने से पहले ही उनकी मृत्यु हो जाती है और कई सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऐसे में कई याचिकाएं अपोषणीय हो जाती हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि रिक्त पद भरने कुछ नाम सुप्रीम कोर्ट भेजे गए हैं, इसलिए अभी याचिका में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। सुनवाई पूर्ण होने के बाद न्यायालय ने दायर याचिका खारिज कर दी।
