धर्मेंद्र सिंह चौहान
इंदौर:देश की जेल प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. ब्रिटिश काल के 130 साल पुराने जेल कानून प्रिजन एक्ट 1884 को खत्म कर अब मोहन सरकार मध्यप्रदेश में नया जेल अधिनियम लागू करने जा रही है. इस अधिनियम के तहत अब जेलों को सुधार गृह कहा जाएगा और जेल विभाग को बंदी गृह एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग के नाम से जाना जाएगा.
इस बदलाव का असर सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जेलों की संरचना, सुविधा और संचालन के तरीके में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा. नए जेल अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं, जिसके बाद इसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा. इसके तहत अब कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, पोषणयुक्त भोजन, महिलाओं के लिए हाइजीनिक सुविधाएं जैसे शैम्पू, हेयर रिमूवल क्रीम आदि भी उपलब्ध कराई जाएंगी.
खतरनाक अपराधियों को अलग रखने, बंदियों की काउंसलिंग, और जेल के भीतर ही कोर्ट सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं भी इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगी. हालांकि, उक्त अधिनियम को 2 अक्टूबर 2024 से लागू किया जाना था, लेकिन तकनीकी त्रुटियों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के चलते इसे टाल दिया गया था, अब इसमें सुधार के बाद इसे नए सिरे से लागू किया जाएगा, जो कि देशभर के लिए एक मिसाल बन सकता है.
इंदौर में आधुनिक सेंट्रल जेल
इंदौर के सांवेर रोड पर 217 करोड़ रुपए की लागत से देश की सबसे आधुनिक सेंट्रल जेल का निर्माण हो रहा है. 50 एकड़ में बन रही इस नई जेल में चार हजार से अधिक कैदियों के लिए जगह होगी और 60 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल भी स्थापित किया जा रहा है. इसके अलावा थर्ड जेंडर के लिए अलग बैरक, जजों के लिए जेल परिसर में ही सुनवाई हेतु चेंबर के साथ ही वीडियो कॉफ्रेसिंग की स्थायी व्यवस्था भी की जा रही है.
