नयी दिल्ली, 05 मई (वार्ता) कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) अपीलीय ट्रिब्यूनलों के गठन की दिशा में तत्काल प्रभाव से कदम उठाए जाने की मांग करते हुए कहा है कि इस तरह के फोरम का न होना जीएसटी कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है।
कैट ने सोमवार को दिल्ली जीएसटी प्रोफेशनल्स ग्रुप (डीजीपीजी ) के साथ मिलकर नई दिल्ली में एक ‘छद्म जीएसटी ट्रिब्यूनल’ का आयोजन किया। कार्यक्रम में जीएसटी कानून के अनुपालन में ट्रिब्यूनलों के महत्व को रेखांकित किया गया। कैट ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि जीएसटी कानून की धारा 112 के अनुसार करदाताओं को जीएसटी अधिकारियों के आदेशों के विरुद्ध अपील करने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरणों का प्रावधान है। करदाताओं के वैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए अपीलीय फोरम का होना जरूरी है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के बावजूद उच्च्तम न्यायालय में लंबित मामलों के कारण राज्यों में अब तक जीएसटी ट्रिब्यूनलों का गठन नहीं हो पाया है। इस देरी के चलते देशभर में दो लाख से अधिक मामलों का लंबित रहना बताया गया है, जिससे करदाताओं को उच्च न्यायालयों में महंगे और समय लेने वाले रिट याचिकाओं के माध्यम से न्याय पाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी अधिनियम की धारा 112, नियम 10 के साथ पढ़ने पर दो स्तरीय अपीलीय ट्रिब्यूनल प्रणाली (राष्ट्रीय/क्षेत्रीय पीठें एवं राज्य/क्षेत्रीय पीठें) के गठन का स्पष्ट प्रावधान किया गया है जो ऑर्डर-इन-अपील या रिवीजनल अथॉरिटी के आदेशों के विरुद्ध अपील की सुनवाई करते है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के अभाव में करदाता संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों में दीवानी रिट याचिकाएं लगानी पड़ रही है पर धारा 117 के प्रावधनों के तहत अपील तभी संभव है जब ट्रिब्यूनल का आदेश मौजूद हो।
‘छद्म जीएसटी ट्रिब्यूनल’ में ट्रिब्यूनल की कार्यवाही का मंचन किया गया हो एक वास्तविक ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया का सटीक चित्रण था। नौ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपीलकर्ताओं की ओर से पैरवी की, जबकि सरकार की ओर से अधिवक्ता सुशील वर्मा ने पक्ष रखा। इस कार्यक्रम में सरकार के वकील ने बड़े पैमाने पर कर चोरी और धोखाधड़ी के मामलों का हवाला देते हुए अधिकारियों की कार्रवाई को उचित ठहराया, जबकि अपीलकर्ताओं ने अधिकारियों की मनमानी, प्रक्रियात्मक उल्लंघन और अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों के हनन की बात रखी।
बयान में कैट ने केंद्र सरकार से जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल के गठन की प्रक्रिया को शीघ्र गति देने का आग्रह किया है।
श्री खंडेलवान ने कहा कि कैट राज्य सरकारों और जीएसटी आयुक्तों को पत्र लिखकर आग्रह करेगा कि वे ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाएं और व्यापार के लिए अनुकूल और न्यायपूर्ण कर प्रणाली सुनिश्चित करें, जिससे राज्य और देश दोनों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
