मुंबई, 08 अप्रैल (वार्ता) वैश्विक टैरिफ वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंताओं और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के चलते उत्पन्न अनिश्चितता से निवेशकों की भावना प्रभावित होने के दबाव में आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया 51 पैसे की गिरावट लेकर 86 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 86.27 रुपये प्रति डॉलर रह गया।
वहीं, इसके पिछले कारोबारी दिवस रुपया 85.76 रुपये प्रति डॉलर पर रहा था।
कारोबार की शुरुआत में रुपया 14 पैसे उतरकर 85.90 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और सत्र के दौरान आयातकों एवं बैंकरों की डॉलर लिवाली के दबाव में 86.29 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया। हालांकि बिकवाली होने से यह 85.83 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर भी रहा। अंत में पिछले दिवस के 85.76 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में 51 पैसे की गिरावट लेकर 86.27 रुपये प्रति डॉलर रह गया।
डीलरों के मुताबिक, पिछले सत्र में लगभग 9,000 करोड़ रुपये के विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) के बहिर्वाह के दबाव में रुपया कमजोर होकर 86.20 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे कारोबार करता देखा गया। यह गिरावट वैश्विक टैरिफ वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंताओं और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के चलते उत्पन्न अनिश्चितता को दर्शाती है, जिसने निवेशकों की भावना को प्रभावित किया है। मौजूदा परिस्थितियों में तत्काल राहत की कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही है।
भारतीय निवेश चक्र में एफआईआई का विश्वास फिलहाल डगमगाता हुआ प्रतीत हो रहा है। ऐसी स्थिति में, प्रवाह को स्थिर करने और रुपये को संभालने के लिए किसी ठोस सकारात्मक ट्रिगर की आवश्यकता है, चाहे वह मैक्रोइकॉनोमिक संकेतों (जैसे मुद्रास्फीति या जीडीपी आंकड़े) से हो या माइक्रो स्तर पर कॉर्पोरेट आय या नीति-संबंधी सुधारों से।
विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में रुपये में अस्थिरता बनी रह सकती है और यह वैश्विक संकेतों तथा विदेशी फंड प्रवाह पर निर्भर करते हुए 85.50 से 86.50 रुपये के प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकता है।
