सियासत
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सत्ता और संगठन दोनों पर फोकस करके चलते है. उनकी कोशिश रहती है कि सरकार के प्रत्येक निर्णय का लाभ भाजपा संगठन के विस्तार के संदर्भ में उठाया जाए. शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्रों में भाजपा को मजबूत माना जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कई बार पार्टी एंटी इनकंबेंसी का नुकसान उठाती है. इसी से बचने के लिए मुख्यमंत्री सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं. जाहिर है सहकारी समितियां ग्रासरूट लेवल पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं.
दरअसल, राज्य सरकार 12 साल बाद मई में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के चुनाव करवाने जा रही है. कार्यक्रम भी तैयार कर लिया गया है। चुनाव सितंबर तक संपन्न करवा लिए जाएंगे. इस संबंध में सभी जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग के मैदानी अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है. प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में चुनाव वर्ष 2013 के बाद से नहीं हुए हैं।
इसके बाद वर्ष 2018 में चुनाव होना था, लेकिन वह प्रदेश में विधानसभा चुनाव, फिर लोकसभा चुनाव, फिर विधानसभा की 30 से अधिक सीटों के लिए उपचुनाव, फिर विधानसभा और लोकसभा चुनाव के कारण टालने पड़े. समिति में अध्यक्ष और सदस्यों के चुनाव किसानों के जरिये किए जाते हैं. पैक्स के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है. 14 मई को सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। सितंबर तक समिति और बैंकों में संचालक मंडल का गठन कर लिया जाएगा. दरअसल, वर्तमान में ये समितियां प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं. प्रदेश के 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में से केवल एक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पन्ना में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार कोर्ट कमिश्नर नियुक्त है. शेष 37 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में प्रशासक नियुक्त हैं
