माउंट आबू में नहीं थम रहा वन क्षेत्र में आग लगने का सिलसिला

माउंट आबू, 31 मार्च (वार्ता) राजस्थान में पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में गर्मी के तेवर तीखे होते ही वन्य क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में आग भड़कनी आरंभ हो गई है।

माउंट आबू आबूरोड मार्ग के छीपाबेरी चौकी के नीचे बरमाणिया महादेव वन्य क्षेत्र की पहाड़ियों में रविवार को अचानक आग लगने की वन विभाग को सूचना मिली। जिस पर अधिकारी एवं कर्मचारी श्रमिकों के लवाजमे के साथ मौके पर पहुंचे। लंबी जद्दोजहद के उपरान्त देर रात तक आग पर काबू पाकर वापस लौट ही रहे थे कि अचानक क्षेत्र में तेज हवा की वजह से आग से जले पेड़ों के ठूठों से चिंगारियां उडकर वन्य क्षेत्र में जगह जगह बिखरने लगी। वहां पतझड़ से गिरे पत्ते, सूखी घास एवं क्षेत्र में बहुतायत में बांस के पेड़ों से आग तेजी से भड़क गई।

सूखी झाड़ियों और पत्तों के चलते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिसने वनौषधि, वनसंपदा, जमीन पर वन्यजीवों को चपेट में ले लिया। आग टाटिया मगरा होते हुए गंभीरी नाला की ओर वन के बड़े भू-भाग पर फैल गई। जिससे जीवन रक्षक दुर्लभ प्रजाति की वनौषधियां, वनसंपदा आग में जलकर खाक हो गयीं।

उपवन संरक्षक शुभम जैन के नेतृत्व में क्षेत्रीय वनकर्मी, नगर पालिका आपदा प्रबंधन दस्ता, दमकल से लेकर करीब 60 श्रमिक आग पर काबू पाने में जुटे रहे। कलेक्टर अल्पा चौधरी ने मौके पर पहुंचकर आग से प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया।

आग से प्रभावित क्षेत्र दुर्गम पहाड़ों, बीहड़ जंगलों के मध्य होने की वजह से वहां किसी व्यक्ति का पहुंचना श्रमसाध्य कार्य है। इसके बावजूद भी वन महकमे की ओर से युद्ध स्तर पर आग पर काबू पाने की कवायद की जा रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर पेड़ों से गिरे हुए पत्ते, सूखी घास एवं बांस के पेड़ वन विभाग के लिए चुनौती बने हुए हैं।

सूत्रों ने बताया कि वन क्षेत्र में आग लगने के कई कारण हैं। इनमें यहां से गुजरने वाले राहगीरों की ओर से जलती बीड़ी, सिगरेट जंगल में फेंकने, मधुमक्खियों के छतों से शहद निकालने को लकड़ियां जलाकर धुआं करने, अवैध रूप से कोयला बनाने, चोरी डकैती जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद वनों में छिपने के दौरान खाना पकाने के लिये चूल्हा जलाने, अंधश्रद्धा के तहत मन्नत पूरी होने पर आदिवासियों की ओर से जगंल में जानबूझकर आग लगाने, बांस आपस में टकराने, अवैध शराब बनाने के लिये वनों में भट्टी लगाने, वन्यजीवों का शिकार करने के लिये उन्हें फंदे की तरफ खदेड़कर फंदों में फंसाने को आग लगाने आदि प्रमुख कारण बताये जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में इस वन क्षेत्र में लगी आग पर सेना की सहायता से काबू पाया गया था।

 

 

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