नयी दिल्ली, 31 मार्च (वार्ता) संसद की एक समिति ने कहा है कि देश में इस समय भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पदों की जरूत के हिसाब से 1316 आईएएस अधिकारियों की कमी है जिससे विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक कार्य और शासन प्रभावित हो रहा है।
राज्य सभा सदस्य बृज लाल की अध्यक्षता वाली लोक शिकायत , विधि और न्याय विभाग से संबंधी संसदीय समिति ने मंत्रालय की 2025-26 की अनुदान मांगों पर राज्य सभा में पिछले दिनों प्रस्तुत अपने प्रतिवेदन में कहा है, ‘इन रिक्त पदों को भरने की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और लोक प्रशासन की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।”
समित ने इस संदर्भ में सरकार से आईएएस अधिकारियों की भर्ती के विषय में चन्द्रमौली समिति की रिपोर्ट का अध्ययन कराने तथा उसे जल्द से जल्द लागू कराने की सिफारिश की है।
समिति ने आईएएस कोटे में रिक्तियों का समय से निर्धरण सुनिश्चित करने के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को राज्यो के लिए एक आनलाइन ट्रैकिंग और प्रस्तुतीकरण पोर्टल शुरू करने का सुझाव दिया है। इससे राज्य सरकारे अपने प्रस्तावों को आन लाइन प्रस्तुत करने के साथ-साथ उस पर प्रगति की मॉनिटरिंग कर सकेंगी और अनुस्मारक प्रस्तुत कर सकेंगी।
समिति का यह भी कहना है कि विभाग को विलंबित प्रस्तुतियों के लिए दंड प्रणाली भी रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए समिति का कहना है कि जो राज्य लगातार समय सीमा को पूरा न करें उन राज्यों से प्रोन्नति कोटा के लिए विचार न किया जाए।
समिति ने यह भी कहा है कि आरक्षित श्रेणी की रिक्तियों के लिए आंकड़ों का संग्रह और भर्ती प्रक्रियाओ के समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए विभाग को एक केंद्रीय निगरानी एवं समन्वय समिति स्थापित करनी चाहिए।
समिति ने यह भी कहा है कि सभी आईएसएस अधिकारियों की ओर से उनकी अचल संपत्तियों के विवरण (आईपीआर) का दखिला समय पर सुनिश्चित कराने के लिए एक केंन्द्रीय निगरानी एवं अनुपालन तंत्र स्थापित किया जाए। अनुस्मारक दिए जाने के बावजूद सम्पत्ति का ब्योरा प्रस्तुत न करने वाले वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की स्वचालित व्यवस्था हो।
समिति ने केंद्रीय सचिवालय सेवाओं (सीएसएस) और केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवाएं (सीएसएसएस) के संवेदनशील पदों पर तैनात राजपत्रित अधिकारियों को हर तीन साल बाद गैर संवेदनशील सीट पर स्थानांतिरि करने की नीति को कारगर तरीके से लागू किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
समिति ने पाया है कि इन सेवाओं के कई अधिकारी ऐसे हैं जो आर्थिक और संवेदनशील सूची में वर्गीकृत विभागों और मंत्रालयों में अनुकूल स्थानों पर आठ-आठ, नौ-नौ वर्ष से अधिक समय से जमे पड़े हैं जबकि इसी अवधि में इस दौरान उनके चार-चार, पांच-पांच संगठन प्रमुखों के तबादले हो चुके हैं।
समिति ने कहा है,‘‘इस प्रवृत्ति का आकलन किया जाना चाहिए। किसी विशेष सीट/स्थान पर लंबे समय तक रहने से भ्रष्टाचार बढ़ता है।” समिति की सिफारिश है कि केद्र सरकार के कार्यालयों की रीढ़ इन इन सेवओं में सभी स्थानांतरण इस समय विद्यमान नीति के अनुसार तुरंत होने चाहिए और किसी भी अधिकारी को किसी भी मंत्रालय में निर्धारित समय सीमा से अधिक नहीं रहना चाहिए।