नयी दिल्ली, 30 मार्च (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मियों की छुट्टियां में बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों जोड़ने का आग्रह करते हुए कहा है कि इससे उनके हुनर और प्रतिभा को पाठ्य पुस्तकों से बाहर की गतिविधियों में अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा जो उन्हें बहुआयामी नागरिक बनाने में मदद करेगा।
श्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 120वीं कड़ी के प्रसारण में आज कहा कि जब परीक्षाएं आती हैं, तो युवा साथियों के साथ वह ‘परीक्षा पे चर्चा’ करते हैं। अब परीक्षाएं हो चुकी हैं। बहुत सारे स्कूलों में तो दोबारा कक्षाएं शुरू होने की तैयारी हो रही है। इसके बाद गर्मी की छुट्टियों का समय भी आने वाला है। साल के इस समय का बच्चों को बहुत इंतजार रहता है। उन्हें भी बचपन के दिन याद आ गए जब वह दोस्तों के साथ दिनभर कुछ-ना-कुछ उत्पात मचाते रहते थे, लेकिन साथ ही वे कुछ रचनात्मक काम भी करते थे उनसे सीखते भी थे।
उन्होंने कहा, “गर्मियों के दिन बड़े होते हैं, इसमें बच्चों के पास करने को बहुत कुछ होता है। यह समय किसी नई हॉबी को अपनाने के साथ ही अपने हुनर को और तराशने का भी है। आज बच्चों के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म की कमी नहीं, जहां वे काफी कुछ सीख सकते हैं। जैसे कोई संस्था तकनीकी शिविर चला रही हो, तो बच्चे वहाँ एप बनाने के साथ ही ओपन सोर्स सोफ्ट के बारे में जान सकते हैं। अगर कहीं पर्यावरण की बात हो, थियेटर की बात हो या लीडरशिप की बात हो, ऐसे भिन्न-भिन्न विषय के कोर्स होते रहते हैं, तो, उससे भी जुड़ सकते हैं। ऐसे कई स्कूल हैं जो भाषण या तो ड्रामा सिखाते हैं, ये बच्चों को बहुत काम आते हैं। इन सबके अलावा आपके पास इन छुट्टियों में कई जगह चल रहे वोलेंटिर एक्टिविटीज, सेवा कार्यों से भी जुड़ने का अवसर है। ऐसे कार्यक्रमों को लेकर मेरा एक विशेष आग्रह है। अगर कोई संगठन, कोई स्कूल या सामाजिक संस्थाएं या तो फिर साईंस सेंटर ऐसी समर एक्टिविटीज़ करवा रहे हों, तो इसे मुझसे साझा करें। इससे देश-भर के बच्चे और उनके माता-पिता को इनके बारे में आसानी से जानकारी मिल सकेगी।”
प्रधानमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुये कहा “मेरे युवा साथियो, मैं आज आपसे भारत के उस खास कैलेंडर की भी चर्चा करना चाहूंगा, जिसे इस समर वेकेशन के लिए तैयार किया गया है। इस कैलेंडर की एक प्रति अभी मेरे सामने है। मैं इससे कुछ अनूठे प्रयासों को साझा करना चाहता हूूं । अभियान का हिस्सा बनकर सीमावर्ती गाँवों में एक अनोखा अनुभव ले सकते हैं। इसके साथ ही वहाँ संस्कृति और खेल गतिविधियों का हिस्सा जरूर बन सकते हैं। वहीं अंबेडकर जयंती पर पदयात्रा में भागीदारी कर आप संविधान के मूल्यों को लेकर जागरूकता भी फैला सकते हैं। बच्चों और उनके माता-पिता से भी मेरा विशेष आग्रह है कि वे छुट्टियों के अनुभवों को ‘ हॉलिडे मेमोरीज’ के साथ जरूर साझा करें। मैं आपके अनुभवों को आगे आने वाली ‘मन की बात’ में शामिल करने का प्रयास करूंगा।”