नयी दिल्ली 26 मार्च (वार्ता) राज्यसभा में बुधवार को बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक 2024 ध्वनिमत मत से पारित होने के साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी।
इससे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ए ए रहीम के संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतातमण ने सदन में बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक 2024 पर लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि काेविड दौर की दबाव से बैंक उबर गये हैं और नयी दिशा की ओर बढ़ रहे हैं इसलिए बैंकिंग सुधार समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऋण माफी जैसा कुछ नहीं है। कर्जदारों से वसूली प्रयास हाे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बैंकों में भ्रष्टाचार रोकने के प्रयास किये हैं जिसके बेहतर परिणाम सामने आये हैं। सार्वजनिक बैंकों मुनाफा अर्जित किया है और प्रबंधन में सुधार हुआ है। लेनदारों से वसूली हुई और ऋणों की वापसी हो रही है। उन्होंने कहा कि डूबा ऋण दर्शाने की एक प्रक्रिया होती है जो वैविश्क स्तर पर मान्य है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों का एनपीए 2.5 प्रतिशत तक घट गया है और मुनाफा बढ रहा है। बैंकों को मजबूत बनाने के लिए स्वाययत्ता आवश्यक है और सरकार प्रयास कर रही है। तीन से पांच बैंकों काे पूंजी उपलब्ध करायी गयी है।
यह विधेयक दिसंबर 2024 को लोकसभा से पारित किया था। यह विधयेक भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934, बैंकिंग नियमन अधिनियम 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम 1955, बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम 1970 और बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम 1980 में संशोधन करता है।
प्रावधानों के अनुसार नकद भंडार आरक्षित नकदी की सीमा अवधि बढाई गयी है और यह प्रत्येक महीने को 15 दिन का औसत होगा। पहले यह सात दिन था। सहकारी बैंकों में निदेशक का कार्यकाल 10 वर्ष होगा। सहकारी बैंक के निदेशक किसी राज्य सहकारी बैंक के बोर्ड के लिए चुना जा सकेगा। कंपनी में सब्सटांशियल इंटरेस्ट पांच लाख रुपए से बढाकर दो करोड़ रुपए कर दिया गया है। एकल या संयुक्त जमा धारकों को अपनी जमा राशि के लिए एक नॉमिनी के स्थान पर अधिकतम चार नॉमिनी की नियुक्ति की अनुमति देता है। यह वरीयक्रम में हाेगा। यह बैंकों को अपने ऑडिटर्स का पारिश्रमिक तय करने का अधिकार देता है।
