बेंगलुरु, 10 मार्च (वार्ता) नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) की औपचारिक शिकायत के बाद केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इंफोसिस के खिलाफ प्रशिक्षुओं की कथित अवैध बर्खास्तगी को लेकर जांच शुरू कर दी है।
एनआईटीईएस ने इंफोसिस पर प्रशिक्षु अधिनियम, 1961 और प्रशिक्षुता नियम, 1992 के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिसमें कंपनी पर 700 से अधिक नए स्नातकों को दबाव में अलगाव समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करने का आरोप है।
एनआईटीईएस के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं और मंत्रालय ने एनआईटीईएस से एक आधिकारिक कार्रवाई रिपोर्ट साझा करने को भी कहा है।
इस मामले ने कर्नाटक श्रम विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एनआईटीईएस का आरोप है कि अक्टूबर 2024 की घटनाओं के दौरान भी विभाग ने इंफोसिस का बचाव किया था। नए स्नातकों ने दो साल तक ऑनबोर्डिंग के लिए संघर्ष किया और अब उन्हें बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के निकाल दिया गया। साथ ही, कर्नाटक श्रम विभाग ने बार-बार रिमाइंडर देने के बावजूद जांच रिपोर्ट साझा नहीं की।
श्री सलूजा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की यह कार्रवाई इंफोसिस को जवाबदेह ठहराने और युवा पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉर्पोरेट दबाव और प्रणालीगत प्रतिरोध के बावजूद एनआईटीईएस और प्रभावित कर्मचारी न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं।

