कोलकाता (वार्ता) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार को पिछले शनिवार (एक मार्च) को शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु के दौरे के दौरान जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) परिसर में हुई हिंसा के संबंध में 12 मार्च तक एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
न्यायालय ने पुलिस को घायल छात्र इंद्रानुज रॉय की ओर से आज ही प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने एक घायल छात्र द्वारा भेजे गए ईमेल पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। घायल छात्र की आंख में चोट तब लगी थी जब शनिवार शाम को एसएफआई सहित वामपंथी छात्रों द्वारा हमला किए जाने के बाद बसु को उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा वहां से ले जाया गया था।
सूत्रों ने बताया कि चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती जेयू के प्रथम वर्ष के छात्र इंद्रानुज रॉय ने न्यायालय को ईमेल भेजकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।
न्यायाधीश ने संभावित खुफिया विफलता और प्रदर्शनकारियों की मंत्री से निकटता के बारे में चिंता व्यक्त की तथा पड़ोसी देश में हुई हिंसक घटनाओं से इसकी तुलना की।
न्यायाधीश ने कहा कि वह नहीं चाहते कि लोग पड़ोसी देश की तरह सुरक्षाकर्मियों से घिरे मंत्री के करीब आएं।
घायल छात्र की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि जेयू और पुलिस ने सात प्राथमिकी दर्ज की लेकिन छात्रों की ओर से एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
सूत्रों ने बताया कि न्यायाधीश ने पूछा कि क्या छात्रों की उपस्थिति के बारे में खुफिया रिपोर्ट मंत्री को बताई गई थी या मंत्री ने उनकी बात सुनी।
न्यायमूर्ति घोष ने स्थिति की गंभीरता व्यक्त की और कहा कि “मैं नहीं चाहता कि यह पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों में एक उदाहरण बने।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक प्रदर्शन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं, “उन्हें इस हद तक नहीं बढ़ाना चाहिए कि वे सार्वजनिक अधिकारियों को खतरे में डाल दें।”
