निश्चित रूप से भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट प्रत्येक दृष्टि से सफल रही है, लेकिन अब इन अनुबंधों को हकीकत के धरातल पर उतारना सरकार के लिए चुनौती है. हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस हकीकत को समझते हैं, इसीलिए उन्होंने निवेश सम्मेलन से पूर्व ही मंजूरियों की कागजी कार्रवाई को सरलीकृत और न्यूनतम बनाने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से वादा किया है कि जल्दी ही उद्योग लगाने की अनुमति लेने के लिए राज्य स्तर पर और जिलेवार सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाएगा. दरअसल,इन्वेस्टर्स की सभी समस्याओं की मानिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कार्यालय करेगा. मुख्यमंत्री ने यह विश्वास भी दिलाया है कि अब उद्योगपतियों को अधिकारियों के आगे पीछे करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि अधिकारी गण उद्योगपति के पास जाएंगे. जाहिर है यदि सचमुच में ऐसा हुआ तो प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदली हुई नजर आएगी. मुख्यमंत्री के दावों और वादों पर अविश्वास करने का कारण इसलिए नजर नहीं आता, क्योंकि उनकी प्रशासनिक क्षमता और विजन साबित हो चुका है.बहरहाल, जहां तक ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में प्राप्त हुए निवेश प्रस्तावों का प्रश्न है, तो दो दिन में ही निवेश के लिए 26.61 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्राप्त हुए. सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में करीब 17.30 लाख नई नौकरियों का सृजन होगा.दरअसल,दो दिन के आयोजन के अलावा भी बीते 7 रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और देश के अन्य शहरों में आयोजित इंटरेक्टिव सेशन में करीब 3.76 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं.इनसे करीब 4 लाख रोजगार पैदा होंगे. इन सभी आंकड़ों को मिला दिया जाए तो प्रदेश में आने वाले समय में करीब 30.77 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने जा रहा है, जिससे 21.36 लाख लोगों को नौकरियां मिल सकेंगी.
दरअसल,इस इंवेस्टर्स समिट में 25 हजार से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इसमें 60 देशों के 100 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए. इनमें अडानी समूह के गौतम अडानी, बाबा एम कल्याणी, पिरुज खंबाटा, राहुल अवस्थी और गोदरेज के नादिर गोदरेज समेत 300 से अधिक अधिक बड़ी कंपनियों के सीईओ और प्रतिनिधि शामिल हुए. इस बार खास बात यह थी कि विभागवार सत्र आयोजित किए गए थे. इससे सभी विभागों में बराबर से निवेश आया. हालांकि सबसे अधिक रिन्युएल एनर्जी में निवेश मिला. दरअसल, राज्य सरकार ने प्रदेश की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यटन, ऑटोमोबाइल और खनिज संपदा पर आधारित उद्योगों को आकर्षित करने की कोशिश की थी, जिसमें अभूतपूर्व सफलता मिली है.दरअसल, एक समय मध्य प्रदेश बीमारू राज्य माना जाता था, लेकिन आज यहां 5 लाख किलोमीटर रोड नेटवर्क है. 6 हवाई अड्डे हैं, 31 गीगावाट की ऊर्जा क्षमता है. इसमें से 30 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी है. देश भर में सबसे ज्यादा खनिज पैदा करने वाला राज्य हमारा मध्य प्रदेश है. प्रदेश देश का कॉटन कैपिटल भी बन गया है. फूड प्रोसेसिंग के लिए भी मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है. जाहिर है इसलिए राज्य सरकार ने 2025 वर्ष को उद्योग वर्ष में मनाने का तय किया है. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश अब आर्थिक विकास के संदर्भ में बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं.