नयी दिल्ली, 22 फरवरी (वार्ता) सरकार ने अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 के मसौदे को नए सिरे से तैयार करके दोबारा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करने की घोषणा की है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इस विधेयक पर सार्वजनिक परामर्श आमंत्रित करने की वर्तमान प्रक्रिया समाप्त कर दी गयी है।
मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 को 13 फरवरी, 2025 को कानूनी मामलों के विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक परामर्श के लिए उपलब्ध कराया गया था, जो पारदर्शिता और हितधारकों और जनता के साथ व्यापक जुड़ाव के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, “ हालांकि, प्राप्त सुझावों और चिंताओं की संख्या को देखते हुए, परामर्श प्रक्रिया को अब समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। प्राप्त फीडबैक के आधार पर, संशोधित मसौदा विधेयक को हितधारकों के साथ परामर्श के लिए नए सिरे से संसाधित किया जाएगा।”
देश में कई स्थानों पर अधिवक्ताओं ने इस विधेयक के विरुद्ध प्रदर्शन और हड़ताल किया है।
सरकार अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक-2025 के जरिए एडवोकेट एक्ट-1961 में कई संशोधन किए जाने के प्रस्ताव हैं। इस विधेयक के उद्येश्यों में भारत की कानूनी पेशे और कानूनी शिक्षा के मानकों को सुधार कर इसे वैश्विक स्तर का बनाना है ताकि देश में कानूनी पढ़ाई करके निकला व्यक्ति बदलती दुनिया की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है। इसका एक वृहद उद्येश्य है कि कानूनी पेशा एक न्यायसंगत और समतापूर्ण समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण में और सार्थक योगदान दे।
