
जबलपुर। जिला प्रशासन द्वारा मनमानी तरीके से वसूली गई फीस को वापस लौटाने के आदेश के खिलाफ निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपीलकर्ता स्कूल 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ 50 प्रतिशत फीस जमा होने पर ही परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान करेंगे। इसके बाद शेष 50 प्रतिशत फीस जमा होने पर परीक्षा परिणाम घोषित करेंगे।
हाईकोर्ट में 21 निजी स्कूल प्रबंधन की तरफ से दायर की गयी अपील में कहा गया था कि नियम अनुसार प्रतिवर्ष स्कूल प्रबंधन बिना अनुमति 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है। फीस में दस प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के लिए जिला स्तर तथा 15 प्रतिशत से अधिक के लिए राज्य स्तर समिति की अनुमति आवश्यक है। अपील में कहा गया था कि नियम अनुसार शैक्षणिक सत्र के 90 दिन पूर्व फीस वृद्धि की जानकारी स्कूल पोर्टल में डालना आवश्यक है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान है। जिला प्रशासन ने ऐसा नहीं करने पर 10 प्रतिशत फीस वृद्धि को ही निरस्त कर दिया। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। जिसके खिलाफ उन्होने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ द्वारा याचिका को खारिज किये जाने के कारण उक्त अपील दायर की गयी है। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई करते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं किये जाने के निर्देश जारी किये थे।
अपील की सुनवाई के दौरान हस्ताक्षेपकर्ता अभिभावक संघ की तरफ से लगभग 50 से अधिक अभिभावक कोर्ट में उपस्थित हुए। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद शेष 50 प्रतिशत फीस जमा होने पर परीक्षा परिणाम घोषित करेंगे। अभिभावकों को आदेश दिये है कि वह 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ तीन दिनों में 50 प्रतिशत फीस का भुगतान स्कूल प्रबंधन को करें। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शेष 50 प्रतिशत फीस का भुगतान एक माह में किया जाये। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की है। अपीलकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
