सतना :उप संचालक मत्स्योद्योग डॉ. अंजना सिंह ने जबलपुर-बेला हाईवे पर खाने-पीने की होटल का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने होटल, ढाबा संचालकों एवं मछली विक्रेताओं को जहरीली थाई मांगुर मछली से होने वाले नुकसान के बारे में समझाइश दी। उन्होंने बताया कि मत्स्य विक्रेताओं द्वारा इस मछली को विक्रय करने पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है। विक्रय करते पाए जाने पर चालान करते हुए जुर्माना का प्रावधान भी किया गया है।
ज्ञातव्य है कि थाई मांगुर मछली एक मांसाहारी मछली है। यह सडे गले मांस खाकर जल्दी बड़ी होने वाली मछली है इसलिए मत्स्य पलक इसे आसानी से पाल लेते है इसको पालने में कम खर्च आता है। यह सिंगल कांटे की मछली है इसलिए मछली खाने वाले इसे पसंद करते है परंतु इसके अंदर पाए जाने वाले हानिकारक तत्वों से अनभिज्ञ रहते हैं। थाई मांगुर मछली में हैवी मेटल जिंक लेड क्रोमियम आदि पाए जाते है जो इंसान के शरीर में स्लो पॉयजन की तरह कार्य करते है इसका असर मानव शरीर में तुरंत नहीं दिखाई देता परन्तु यह कई प्रकार की जेनेटिक बीमारियों को पैदा करती है। इसलिए भारत सरकार द्वारा इस मछली के पालन/विक्रय/आयात/निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है।
