अहमदाबाद, 07 फरवरी (वार्ता) गुजरात के अहमदाबाद में ‘मंगल सेवा’ के तहत 500 नवविवाहित दिव्यांग महिलाओं को आर्थिक सहायता जैसे नेक काम की पहल के साथ शुक्रवार को जीत अदाणी और दिवा शाह शादी के बंधन में बंधेंगे।
अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी ने शुक्रवार को यहां जारी अपने बयान में सभी अटकलों को दरकिनार करते हुए कहा कि उनके छोटे बेटे जीत यह विवाह बेहद पारंपरिक और निजी समारोह होगा जिसमें परिवार के रिश्तेदार और करीबी दोस्त शामिल होंगे, जो स्वागत योग्य कदम है। अडानी परिवार ने समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने और समुदाय की भलाई के नेक काम को इस उत्सव का हिस्सा बनाया है और यही बात इस विवाह को सही मायने में अनोखा बनाती है।
श्री अडानी ने कहा कि यह बात जगजाहिर है कि जीत हमेशा से ही दिव्यांगजनों (पीडब्ल्रूडीएस) के उत्थान के बड़े हिमायती रहे हैं, जिन्होंने इस सामाजिक ज़िम्मेदारी को अपने विवाह के जश्न का हिस्सा बनाने का फैसला किया है। वे मानते हैं कि यह सिर्फ़ स्नेह भरा मिलन नहीं है, बल्कि इसका नाता दिव्यांगजनों के उस हुनर और काबिलियत से है, जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। इस नेक पहल के ज़रिये उन्होंने सही मायने में विवाह के आयोजन की एक नई मिसाल कायम की है, जिसमें उत्सव पारिवारिक सीमाओं के दायरे से निकलकर सामाजिक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जनकल्याण की भावना हमेशा से ही अडानी परिवार के दिल में बसी है। अडानी फाउंडेशन की ग्रीनएक्स टॉक्स (जीआरईईएनएक्स टीएएलकेएस) उनके इसी संकल्प की एक मिसाल है। यह बदलाव लाने वाले ऐसे लोगों को सक्षम बनाने की पहले है, जो अपने कार्यों में समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को मुनाफ़े से ज़्यादा अहमियत देते हैं। ग्रीनएक्स के ज़रिये, यह फाउंडेशन 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) को बढ़ावा देता है और इसने पहले ही देश भर के नौ मिलियन से अधिक लोगों, खास तौर पर समाज के सबसे कमजोर तबके के लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
श्री गौतम अडानी ने कहा कि जीत की समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिशें सिर्फ़ फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने शार्क टैंक में भी समाज के सबसे कमजोर तबके के लोगों के उत्थान के बारे में बात की थी और कहा था कि दिव्यांगजनों की काबिलियत को सीमाओं में बांधना उचित नहीं है। मिट्टी कैफे और फैमिली फॉर डिसेबल्ड जैसे एनजीओएस के साथ साझेदारी के माध्यम से, जीत इस बात की हिमायत करते हैं कि रोजगार ही व्यक्ति को सम्मान दिलाने और सक्षम बनाने का सबसे बड़ा साधन है। उनकी ये मुहिम अडानी समूह के उस आदेश से मेल खाती है, जिसके अनुसार समूह के कर्मचारियों में पांच प्रतिशत दिव्यांगजन शामिल होने चाहिए।
