जवाहर नगर स्टेडियम के सामने का मामला, चिकित्सक ने लगाया राजस्व अमले पर दादागिरी का आरोप
सतना :शहर के जवाहर नगर स्टेडियम के सामने संचालित पंजीकृत क्लीनिक को सील करा दिया गया. जिसके पीछे का कारण संबंधित चिकित्सक द्वारा अपनी चिकित्सा पद्धति से इतर दूसरी पद्धति से इलाज करना बताया गया. इस कार्रवाई के दौरान एक ओर जहां एसडीएम और तहसीलदार सहित राजस्व अमला मौजूद रहा, वहीं दूसरी ओर सीएमएचओ और औषधि निरीक्षक भी मौके पर उपस्थित रहे.शहर के लाड़ली लक्ष्मी पथ पर जवाहर नगर स्टेडियम के सामने चिकित्सक डॉ. वी के तिवारी द्वारा अपनी क्लीनिक का संचालन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है. हर रोज की तरह गुरुवार को भी उनकी क्लीनिक में काफी मरीज बैठे हुए थे.
जिनकी जांच करते हुए डॉ. तिवारी द्वारा दवाएं लिखी जा रही थीं. लेकिन इस समूचे घटनाक्रम में अचानक तब गतिरोध आ गया जब राजस्व अमले से डॉ. साहब का आमना-सामना हो गया. हलांकि गुरुवार की दोपहर तहसीलदार रघुराज नगर के नेतृत्व में राजस्व अमला तो वहां पहले से ही मौजूद था. वहीं लगभग 2 बजे एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिय़ा भी वहां पहुंच गए. इसी कड़ी में कोतवाली थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी भी पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद हो गए. क्लीनिक के संचालन को लेकर राजस्व अमले द्वारा जवाब तलब किए जाने पर डॉ. तिवारी ने आपत्ति जताई जिसके चलते माहौल गर्माता नजर आने लगा. मामले की गंभीरता बढ़ते ही वहां पर मौजूद सभी मरीजों को एक एक करके बाहर निकाल दिया गया.
ैवहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सूचित किए जाने पर कुछ ही देर में सीएमएचओ डॉ. एल के तिवारी और औषधि निरीक्षक प्रियंका चतुर्वेदी भी वहां पहुंच गए. सीएमएचओ द्वारा कुछ औपचारिक जानकारी लिए जाने के बाद डॉ. तिवारी की क्लीनिक को बंद कराने का आदेश दे दिया गया. लिहाजा आदेश के परिपालन में उक्त क्लीनिक पर ताला लगाते हुए उसे सील कर दिया गया. जिसे देखते हुए क्लीनिक संचालक डॉ. तिवारी द्वारा कड़ा प्रतिरोध जताया जाने लगा. कार्रवाई के चलते वहां पर काफी देर तक गहमा-गहमी बनी रही. इस मामले में सीएमएचओ डॉ. एल के तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जांच में डॉ. वी के तिवारी की क्लीनिक पंजीकृत पाई गई. लेकिन उन्हें जिस विधा में इलाज करने का लाइसेंस मिला हुआ है, वे उससे इतर दूसरी विधा का इलाज करते पाए गए. जिसके आधार पर उन्हें अपनी क्लीनिक बंद करने के लिए निर्देशित किया गया.
एकतरफा कार्रवाई का आरोप
इस मामले में क्लीनिक संचालक डॉ. वी के तिवारी ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि तहसीलदार की दादागिरी के चलते इस तरह की एकतरफा कार्रवाई की गई है. अपने पद के मद में चूर तहसीलदार ने फोन कर एसडीएम को मौके पर बुला लिया. जिसके बाद उनके मरीजों को बाहर निकालते हुए जबरदस्ती कार्रवाई की गई. वे पिछले 34 वर्ष से यहां पर क्लीनिक संचालित करते आ रहे हैं. यदि उनके द्वारा इलाज में कोई गड़बड़ी की गई होती अथवा उनकी गलती की शिकायत हुई होती तो उनके विरुद्ध नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाता. लेकिन यहां पर न कोई शिकायत हुई, न जवाब मांगा गया, सीधे क्लीनिक सील कर दी गई. डॉ. तिवारी के अनुसार अवैध क्लीनिकों के संचालन के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बकायदा एक समिति बनी हुई है. कलेक्टर जिसके पदेन अध्यक्ष होते हैं. इस समिति में एसडीएम, एसडीओपी और चिकित्सक सहित अन्य सदस्य शामिल होते हैं. पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए संयुक्त जांच की जाती है. जिसमें खामी पाए जाने पर कलेक्टर द्वारा कार्रवाई संबंधी आदेश दिए जाते हैं. लेकिन यहां पर सारे वरिष्ठ अधिकारियों को सुपर सीड करते हुए केवल तहसीलदार ने अपनी मनमर्जी चलाई.
मेडिकल स्टोर भी बंद
डॉ. तिवारी की क्लीनिक में एक ओर जहां काफी मात्रा में अंग्रेजी दवाओं का स्टॉक रखा पाया गया. वहीं दूसरी ओर क्लीनिक के दूसरे हिस्से में मौजूद कथित कंपाउंडर मरीजों को सैलाइन बॉटल और इंजेक्शन लगाते हुए पाया गया. जिसके चलते कथित मेडिकल स्टोर पर भी ताला जड़ दिया गया. हलांकि मेडिकल स्टोर के विरुद्ध हुई किसी तरह की कार्रवाई के संबंध में सीएमएचओ द्वारा अनभिग्यता जताई गई. लेकिन इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार औषधि निरीक्षक प्रियंका चतुर्वेदी ने हर बार की तरह इस बार भी चुप्पी साध ली. उक्त क्लीनिक के कथित मेडिकल स्टोर में किस तरह की अनियमितता मिली. इस संबंध में औषधि निरीक्षक के पास कोई जवाब नहीं था. गौरतलब है कि शहर सहित जिले भर में तमाम मेडिकल स्टोर अवैध तौर पर संचालित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं. लेकिन इसके बावजूद भी औषधि निरीक्षक द्वारा कभी भी जांच करने की जहमत नहीं उठाई जाती. दवा कारोबार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वैध हो अथवा अवैध सभी तरह के कारोबार के लिए सेवा शुल्क की अलग-अलग दरें निर्धारित हैं. कारोबारी संगठन के कुछ लोग इस सेवा शुल्क को वसूलकर औषधि निरीक्षक तक पहुंचाने का काम करते हैं.
