तीन दिनों में एक बार आते संचालक
जबलपुर:जिले में 11 लोक सेवा केंद्र मौजूद है। जिसमें शासन के लगभग 28 विभागों की 120 से ज्यादा सेवाएं आम जनता तक पहुंचाई जाती है। लेकिन विभाग द्वारा संचालित लोक सेवा केंद्रों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसमें ड्रेस, ऑनलाइन भुगतान, संचालक की गैर मौजूदगी सहित अन्य व्यवस्थाएं सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं। आलम यह है कि लोगों को पता ही नहीं होता है कि आखिर लोक सेवा केंद्र में कौन कर्मी है और कौन आवेदक।
सिर्फ नगद ही स्वीकार
केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया 2015 में शुरू किया गया था। जिसको अब दस साल हो चुके है। लेकिन लोक सेवा केंद्र अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है जहां अधिकांश सरकारी विभागों को डिजिटल कर दिया गया है, लेकिन लोकसेवा केंद्र में डिजिटल इंडिया की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यहाँ फॉर्म हो या फिर आवेदन शुल्क जमा करना केंद्र में सिर्फ नगद राशि ही माँगी जा रही है, जिससे आवेदक परेशान हो रहे हैं। उनको कैश के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
रोज आ रहे हजारों आवेदन
कलेक्ट्रेट स्थित लोक सेवा केंद्र के कर्मचारियों से जब आवेदनों की जानकारी के बारे में पूछा गया उन्होंने बताया कि मूल निवासी एवं आय प्रमाण पत्र के लिए रोजाना 1000 से अधिक आवेदन आ रहे हैं। इसके साथ ही जाति प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए आवेदन करने आते हैं जिसको बनने में लगभग एक माह का समय लगता है। इनमें से अधिकांश आवेदक ऑनलाइन पेमेंट वाले होते हैं, लेकिन लोकसेवा केंद्रों में ये सुविधा न होने के कारण आवेदक परेशान हो रहे हैं। वही बात करें अगर आय और मूल निवासी पत्र की तो इसे एक दिन में बनाकर तैयार कर दिया जाना चाहिए, लेकिन सूत्रों की माने तो तहसीलदारों की हड़ताल के चलते यह प्रमाण पत्र हफ्तों में बन रहे हैं।
तीन दिनो में एक बार आते है संचालक
सेवा केंद्र के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कलेक्ट्रेट स्थित लोक सेवा केंद्र के संचालक मनोहर लाल चतुर्वेदी तीन दिनों में एक बार ही कार्यालय आते है। वजह पूछने पर बताया गया कि उनका अभी बाहर से यहां तबादला हुआ है जिसके चलते वह नियमित रूप से यहां नहीं आ रहे हैं। इसकी जानकारी मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों को भी है। इसके बाद भी वे एक्शन नहीं ले रहे है।
इनका कहना है
मैंने अभी तीन दिन पूर्व ही लोकसवा केंद्र का चार्ज लिया है। आपके द्वारा बताई गई समस्याओं पर जानकारी लूंगी और इस पर कार्यवाही भी की जाएगी। रही बात डिजिटल पेमेंट की तो अभी मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
शिवाली सिंह, डिप्टी कलेक्टर
