बेला समिति की जांच का आज तक नहीं मिला प्रतिवेदन
जबलपुर: समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी तो खत्म हो चुकी है, लेकिन इस खरीदी में धांधली करने वाली समितियों पर किसी भी प्रकार से कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। जिसका नतीजा यह निकला कि खरीदी खत्म होते ही समितियां जांच और कार्यवाही दोनों से बच गई। जिस पर अधिकारियों की हीलाहवाली सामने आ रही है। जिसमें कुछ समिति द्वारा धांधली करने पर जांच करने के लिए दल गठित किया था, परंतु जांच दल में शामिल अधिकारी ही उसको ढील देते गए।
इसी क्रम में धान खरीदी में व्यवस्था और गड़बडिय़ां की जांच करने के लिए कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा कई खरीदी केंद्रों का दौरा किया गया था। इस मौके पर दौरान शिव शक्ति वेयर हाउस में स्थापित बेला समिति के उपार्जन केंद्र में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थी, जिसके बाद कलेक्टर द्वारा समिति की जांच के आदेश देते हुए चार सदस्य टीम बनाई गई थी, लेकिन आज तक उस जांच का प्रतिवेदन सामने नहीं आया है।
इन अधिकारी को सौंपी थी कमान
बेला समिति की जांच करने की जिम्मेदारी शशांक दुबे तहसीलदार सिहोरा, नीलम उपाध्याय कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी, रामेन्द्र पवार शाखा प्रबंधक एमपी डब्लूएलसी रिछाई, एन.पी. विश्वकर्मा सहकारिता विस्तार अधिकारी शहपुरा को जांच दल में शामिल किया था।
बोरों में नहीं लगे थे टैग , मिली थी गड़बड़ी
विदित है कि खरीदी के समय जब कलेक्टर द्वारा केंद्र का निरीक्षण किया गया था तो इस दौरान कई गड़बडिय़ां सामने आई थी। जिसमें गोदाम के अंदर रखे हुए बोरों में टैग नहीं लगे हुए थे और बहुत से बोरे 38 किलो के भी थे। जिनमें वजन नहीं लिखा गया था। इसके साथ ही किसानों का माल बाहर रखा हुआ था और जो व्यापारियों का माल तोला गया था वह गोदाम के अंदर रख लिया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला था कि केंद्र में स्लॉट से ज्यादा धान की तुलाई हुई है। जिसके चलते बड़ी मात्रा में धान गीली हुई थी। इसके अलावा केंद्र में कांटों की संख्या भी कम मिली थी।
समिति के दूसरे केंद्र में भी यही थी हालत
बेला समिति द्वारा खरीदी के लिए दो केंद्र स्थापित किए गए थे, जिसमें एक केंद्र शिव शक्ति वेयर हाउस में है और दूसरा केंद्र अन्नपूर्णा वेयरहाउस में है। प्रशासन द्वारा एक ओर जहां शिव शक्ति वेयर हाउस के उपार्जन केंद्र की जांच की करनी थी, वहीं दूसरी तरफ अन्नपूर्णा वेयरहाउस में भी यही हाल थे। यदि प्रशासन द्वारा दोनों वेयरहाउस की भी जांच की जाती तो कई मामले सामने आते। इसके अलावा केंद्र का संचालन भी बाहरी व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा था। जिसका समिति से कोई लेना- देना नहीं था और वहां दूसरे जिलों से लाया हुआ घटिया माल तोला जा रहा था।
