महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों को लेकर समाजसेवियों ने जताई चिंता
इंदौर: पिछले कई वर्षों से नारी सशक्तिकरण की बात होती आ रही है. नारी सुरक्षा कानून होते हुए भी नारी उत्पीड़न की घटनाओं में कमी नहीं हुई. हर वर्ष कई प्रकरण दर्ज होते आ रहे हैं. वहीं सख्ती होने के बावजूद अपराध बढ़ रहे हैं. नए वर्ष में संकल्प की बात सामने आ रही है ताकि नारी उत्पीड़न ख़त्म किया जा सके.नारी सशक्तिकरण को और मज़बूत बनाने के लिए कई देश भर में सैकड़ों संस्थाएं कार्य कर रही है लेकिन इनकी अनुसार कार्य से नारी सुरक्षा और सशक्त नही हो सकती क्योंकि बनाए गए कानून का पालन प्रशासन या पुलिस करवाती है.
इससे अपराधिक प्रवृत्ति वालों में डर का महौल बना रहेगा. सिर्फ दुष्कर्म की ही बात की जाए तो एक सर्वे रिर्पोट के अनुसार भरत में हर घंटे तीन महिलाए शिकार होती है यानी प्रत्येक बीस मिनिट में एक दुष्कर्म अपराध घटित होता है जो बड़ी चिंता की बात है. एक और चौंकाने वाली बात सामने आती है सौ में से 27 अपराधियों को ही सजा होती है, बाकी बरी हो जाते हैं. दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है. आकड़ों को देखते हुए नए वर्ष में प्रदेशभर में महिलाओं की आवाज़ बुलंद होती जा रही है. वहीं शहर में भी नारी सशक्तिकरण को लेकर शहर को नंबर वन बनाने की मांग भी बढ़ रही है. इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुरुषों ने भी चिंता जताते हुए विरोध किया है.
इनका कहना है
कई वर्षों से सुनते आ रहे है कि नारी उत्पीड़न कम होगा लेकिन आज तक इनमें कमी नहीं आई है. नारी सशक्तिकरण को मज़बूत बनाने के लिए नए वर्ष में सभी को संकल्प लेना होगा.
– नीलम खुराना, समाज सेविका
अगर हम हर चीज़ में नंबर वन हो रहे हैं तो अपराध मुक्त शहर भी बनना चाहिए जो आने वाली पीढ़ी कों सुरक्षा प्रदान करेगा. शासन-प्रशासन को हर हाल में सख्ती करनी होगी.
– रेहाना खान, समाज सेविका
दहेज, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, नारी अत्याचार जैसे मामलों पर आज तक रोक नहीं लग पाई है तो किस कानून के पालन की बात कर रहे हैं. अब कड़े कदम उठाते हुए बदलाव की ज़रूरत है.
– आरपी शर्मा समाजसेवी
