निगम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पद पर नवनिर्वाचित पार्षदों की भी निगाहें..

महाकोशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
नगरीय निकाय चुनाव में रिकॉर्ड 44 पार्षद जीतने वाली भाजपा के लिए फिलहाल नगर निगम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चुनाव बड़ा प्रश्न बना हुआ है। अनुभवी नेताओं के साथ वह पार्षद भी अपने आकाओं को रिझाने में लगे हुए हैं जो पहली बार निर्वाचित हुए हैं। क्षेत्रीय क्षत्रप उन्हें कितनी मदद पहुंचा पाते हैं यह सवाल अलहदा है, किंतु पार्षदों की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके साथ अनेक पार्षदों का समर्थन है। बात यहां तक तो ठीक है लेकिन मजेदार बात यह है कि जिन पार्षदों के समर्थन का वह दावा कर रहे हैं, वह खुद भी नगर निगम अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने का ख्वाब देख रहे हैं,जबकि सांगठनिक पदाधिकारी कोई पत्ते नहीं खोल रहे हैं। नगर निगम सदन के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पद की अहमियत के मद्देनजर अनुभवी कमलेश अग्रवाल और रिंकू विज के नाम सर्वाधिक चर्चा में हैं।

सूत्रों पर भरोसा करें तो दो बार के पार्षद रिंकू विज को नगर निगम अध्यक्ष बनाया जा सकता है। रिंकू नगर निगम में उपाध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं और उन्हें कैंट विधायक अशोक रोहाणी का काफी करीबी माना जाता है। महापौर चुनाव में कैंट क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है और इसके चलते भाजपा विधायक अशोक रोहाणी ताकतवर बनकर उभरे हैं। लिहाजा उनकी बात को तवज्जो मिलना तय है, उनके आड़े केवल एक बात ही आ सकती है, वह यह कि पार्टी एन वक्त पर कहीं महिला कार्ड ना खेल दे। रोहाणी विरोधी खेमा भी इस बात को हवा दे रहा है कि सुमित्रा बाल्मीकि की तरह इस बार भी किसी महिला को ही आसंदी पर बैठाया जाए। तर्क दिए जा रहे हैं कि महिला को अध्यक्ष बनाने से यह संदेश जाएगा कि भाजपा महिलाओं को राजनीति में बराबर का भागीदार मानती है, इस दृष्टि से लवलींन आनंद, अर्चना सिसोदिया के नाम उछाले जा रहे हैं।

रेस में आगे कमलेश

महापौर प्रत्याशी की रेस में आगे रहने के बावजूद दो बार एम आई सी सदस्य और चौथी बार पार्षद निर्वाचित होने वाले कमलेश अग्रवाल की जगह डॉ जितेंद्र जामदार को महापौर प्रत्याशी बनाया गया । वहीँ कैंट विधान सभा के अपने परंपरागत वार्ड से हटाकर कमलेश को दूसरी विधानसभा के वार्ड से चुनाव लड़ाया गया। तब इस बात की चर्चा ज्यादा थी कि कैंट विधायक अशोक रोहाणी और कमलेश अग्रवाल के बीच राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उन्हें दूसरे वार्ड भेजा गया। रोहाणी खेमा भी यह मानकर चल रहा था कि अग्रसेन वार्ड जहां सवर्ण वोट अधिक हैं और वहां स्थानीय कैंडिडेट समर्थ तिवारी सशक्त साबित होंगे । स्मरण रहे कि समर्थ तिवारी के नाम की घोषणा उपरांत उनकी जगह कमलेश को यहां से उम्मीदवार बनाया गया था।

प्रत्याशियों की घोषित सूची से नाम हटाए जाने से समर्थ तिवारी बेहद नाराज थे और निर्णय से खफा समर्थ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। कयास लगाए जा रहे थे कि समर्थ तिवारी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी कमलेश अग्रवाल को कड़ी चुनौती देंगे, लेकिन हुआ ठीक उलट। राजनीतिक भविष्य खतरे में देख कमलेश ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा और न केवल अच्छे अंतर से जीत दर्ज की बल्कि अपने राजनीतिक सामर्थ्य का परिचय देते हुए समर्थ को तीसरे स्थान पर धकेल दिया, साथ ही अपने विरोधी खेमे को भी मंसूबों पर पानी फेर दिया। आश्चर्यजनक जीत के साथ कमलेश अग्रवाल नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। बहरहाल 10 अगस्त को निगम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का मनोनयन होना है, यह देखना दिलचस्प होगा कि चर्चाओं में आगे रहने वाले किसी नाम को पार्टी आगे बढ़ाती है या फिर कोई चौंकाने वाला निर्णय करती है।

दमोह में मंत्री – वरिष्ठ नेताओं के कारण भाजपा की हो रही किरकिरी
अप्रैल 2021 में हुए विधानसभा उपचुनाव और हाल ही में नगर पालिका- जिला पंचायत चुनाव में करारी शिकस्त से यह साफ हो गया है कि सवा साल के अर्से में भाजपा अपने गिरते जनाधार बल्कि स्थानीय क्षत्रपों की अंदरूनी लड़ाई को रोक पाने में विफल रही है। ताजा मामला जिला पंचायत का है, जहां बहुमत का दावा किए जाने के बाद भी भाजपा अध्यक्ष नहीं बनवा पाई। हैरत की बात तो यह है कि भाजपा की ओर से घोषित जानकी चंद्रभान सिंह प्रस्तावक ना मिलने के कारण फार्म तक दाखिल नहीं कर सकी। इस मामले में चौंकाने वाली बात पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल एवं केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री तथा दमोह सांसद प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा कही गई हैं। शिवचरण पटेल की ओर से गंभीर आरोप लगाया गया है कि भाजपा प्रत्याशी जानकी चंद्रभान सिंह के भाई चंदन एवं धर्मपाल सिंह भी पंचायत चुनाव जीते हैं, ऐसे में प्रस्तावक ना मिलना हास्यास्पद है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री जयंत मलैया, पूर्व विधायक लखन पटेल, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी ने पार्टी के विरुद्ध षड्यंत्र रचा। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी इसी तरह का बयान देते हुए कहा कि उपचुनाव के बाद से जिले में पद लोलुप नेता गोलबंद होकर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बड़े नेताओं के बयान के बाद जिले के राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि वोटों के खेल में बड़ी डीलिंग हुई, जिसके चलते जानकी चंद्रभान सिंह का नामांकन दाखिल नहीं हुआ, वही चंद्रभान सिंह की ओर से पहले कहा गया था कि उन्होंने फार्म दाखिल कराया है। कहने वाले तो कह रहे हैं कि जिला पंचायत सदस्य चुनाव फार्म भरते वक्त तो अधिकारियों की ओर से जाति प्रमाण पत्र में कोई त्रुटि नहीं पकड़ी गई किंतु चुनाव जीतने के बाद ऐसा क्या अधिकारियों को मिल गया जो जाति प्रमाण पत्र में तकनीकी खामी मिल गई। सवालों और आरोपों की सियासत पर प्रदेश संगठन का एक्शन क्या होगा, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की निगाह लगी हुई है।

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