काश.! जो कार्रवाई अब हो रही वे पहले हो जाती तो शायद 8 जिंदगियां जिंदा न जलती

सीएमएचओ, फायर सेफ्टी ऑफिसर के बाद अब ननि उपयंत्री-संभागीय यंत्री निलंबित
अब तक 24 अस्पतालों का पंजीयन निरस्त

जबलपुर: न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते 1 अगस्त को आठ जिंदगियां जिंदा जल जाने के बाद जिस तरह से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ है और फायर एनओसी समेत अन्य मापदण्डों की सघन जांच की कर रहा है इसी सक्रियता अगर पहले दिखाई होती तो शायद इतना बड़ा अग्निकांड न होता। जिले में न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी समेत अन्य निजी अस्पतालों में नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किस तरह से नियम कायदों को ताक पर संचालन हो रहा था इसकी पोल खुल गई है। आठ मौतों के बाद ताबड़तोड़ अंदाज में चल रही अस्पतालों की जांच में ढेरों खामियां उजागर होना यह बताता है कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम में बैठें जिम्मेदारों और अस्पतालों संचालकों के बीच कितनी तगड़ी सेटिंग थी और वेे मरीजों की जान के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ कर रहे थे।

अगर अब तक की कार्रवाईयों पर नजरें दौड़ायें तो फायर एनओसी न होने एवं अन्य मापदण्डों को पूरा नहीं करने एवं अन्य कमियां पाए जाने पर अब तक कुल 24 अस्पतालों के पंजीयन निरस्त किये जा चुके हैं। इसके साथ ही इन अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती पर भी रोक लगाई जा चुकी है। वहीं सीएमएचओ, फायर सेफ्टी ऑफिसर के बाद ननि उपयंत्री-संभागीय यंत्री को भी निलंबित कर दिया गया है। न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी हुए अग्निकांड पर निगमायुक्त आशीष वशिष्ठ ने एक्शन लेते हुए भवन अनुज्ञा, अतिक्रमण आदि बिन्दुओं पर जांच करवाई। जिसमें यह बात सामने आई है कि अस्पताल द्वारा नगर निगम को गलत जानकारी देते हुए भूतल और प्रथम तल का नक्शा और इसी के अनुरूप फायर प्लान जमा किया था।

बाद में अस्पताल में एक मंजिला और अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया। इस मामले में संभागीय कार्यालय में पदस्थ उपयंत्री अक्षय सरागवी और संयंत्री शैलेन्द्र गोरव की लापरवाही उजागर होने पर निलंबित कर दिया गया है।भोपाल अग्निकांड के बाद भी नहीं जागेे थे जिम्मेदारभोपाल में नवम्बर 2021 में कमला नेहरू अस्पताल के चिल्ड्रंस वार्ड में आग लग गई थी। इस अग्निकांड मेें चार बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे प्रदेश मेें अस्पतालोंं की जांच के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद भी शहर के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद से नहीं जागे थे। अब जब न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद आठ मौतें हुई तब जिम्मेदार गहरी नींद से जागे है।
अग्निकांड में अस्पताल प्रबंधन के साथ जिला व निगम प्रशासन भी दोषी-
अग्नि दुर्घटनाओं पर अंकुश के सिलसिले में समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी होते रहे है। इसके बावजूद उनका पालन नदारद होना प्रशासन की लापरवाही है। शहर में संचालित हो रही अस्पतालों मेंं अग्नि हादसे से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। जिसके चलते
न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में हुए अग्निकांड का दोषी जितना अस्पताल प्रबंधन है उतना ही जिला एवं निगम प्रशासन भी है।
फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र के लिए गाइड लाइन जारी
व्यवसायिक भवनों में फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र के लिए नगर निगम ने गाइड लाइन जारी कर दी है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, सहित अन्य बड़े व्यवसायिक भवनों में निर्धारित मापदण्डों के अनुसार अब अग्नि शमन यंत्र लगाने होगें। निगमायुक्त आशीष वशिष्ठ ने व्यवसायिक सभी भवनों की जॉंच करने टीम गठित कर दी है। गठित टीम के सभी सदस्य शहर भर में भ्रमण करेगें और व्यवसायिक भवनों का भौतिक सत्यापन करते हुए वहॉं स्थापित फायर सेफ्टी यंत्री की जॉंच करेगें। जॉंच के दौरान फायर सेफ्टी से संबंधित कोई भी खामियां पाई जाती है तो संचालकों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी।
गुनहगारों की गिरफ्तारी के लिए शहर से बाहर छापेमारी कर रही 3 टीमें
पांच दिन बीत जाने के बाद भी आठ मौतों के गुनहगार डॉ. निशिंत गुप्ता पिता जय मंगल प्रसाद गुप्ता निवासी शीतलपुरी कालोनी उखरी कोतवाली, डॉ. संजय पटेल निवासी नया पैट्रोलपंप शीतला माई के पास थाना घमापुर, डॉ. सुरेश पटैल पिता जगदीश पटेल निवासी राममंदिर के पास गांधी वार्ड नरसिंहगढ जिला दमोह हाल संजीवनी नगर, सीनियर मैनेजर विपिन पाण्डेय निवासी त्रिमूर्ति नगर गोहलपुर पुलिस गिरफ्त से दूर है जिसनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जार ही है।

सतना, दमोह, नरसिंहपुर में टीमों ने दबिश दी है। फरार चारों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रूपए का ईनाम भी घोषित है। गढ़ा सीएसपी तुषार सिंह का कहना है कि तीन टीमें शहर से बाहर गई हुई है जो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। विदित हो कि प्रकरण में डॉ. संतोष सोनी उम्र 36 वर्ष निवासी महाराजपुर अधारताल एवं सहायक मैनेजर राम सोनी पिता महेन्द्र सोनी 29 वर्ष निवासी रामवार्ड पनागर की पूर्व में गिरफ्तारी हो चुकी है और दोनों जेल जा चुके है।

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