
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने अपने 36 वर्षों के न्यायिक सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस लंबी यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर काम करने का अवसर मिला और इस दौरान नए सामाजिक मूल्य, मित्र तथा जीवन के अनेक सबक सीखने को मिले। अपने संबोधन में उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि कार्यकाल के दौरान अनजाने में उनसे किसी को कोई कष्ट पहुंचा हो तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर 37 रह गई है, जबकि स्वीकृत पदों में 16 पद रिक्त हो गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक योगदान को सराहा
हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर-1 में दोपहर को आयोजित समारोह में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने जस्टिस अग्रवाल की न्यायिक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में न्यायिक सेवा शुरू करने वाले जस्टिस अग्रवाल ने हाईकोर्ट में करीब तीन साल के कार्यकाल के दौरान 16,353 मामलों का निराकरण किया। समारोह में केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह, स्टेट बार काउंसिल की विशेष समिति के सदस्य दीपेंद्र सिंह सहित जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर के अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनके योगदान और न्याय के प्रति निष्ठा की सराहना की।
