नई दिल्ली, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी हालिया वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सामरिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई दिशा दी है। अपनी यात्रा के दौरान डोभाल ने ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर ‘क्वान सू पगोडा’ के दर्शन कर भारत और वियतनाम की साझी 2,000 साल पुरानी बौद्ध विरासत को रेखांकित किया। इसके उपरांत, उन्होंने वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल लुओंग ताम क्वांग तथा रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग से मुलाकात कर साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की।
ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल सौदे और रक्षा क्रेडिट के जरिए भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी को मिल रही है नई ऊंचाई
यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के ढांचे को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। भारत ने हाल ही में वियतनाम को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली आपूर्ति करने के समझौते के साथ-साथ हाई-स्पीड पेट्रोल बोट्स और मिसाइल कार्वेट सौंपे हैं। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारत द्वारा वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने के ये प्रयास क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और आसियान (ASEAN) देशों के साथ भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्यों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
‘बैंबू डिप्लोमेसी’ और सामरिक स्वायत्तता का तालमेल, चीन की चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते हुए प्रगाढ़
विशेषज्ञों के अनुसार, वियतनाम की ‘बैंबू डिप्लोमेसी’ (लचीली कूटनीति) और भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीतियां एक-दूसरे की पूरक हैं, जो किसी सैन्य गठबंधन में शामिल हुए बिना क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर देती हैं। पूर्व राजनयिकों का मानना है कि डोभाल की यह यात्रा केवल रक्षा समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन के रास्ते आने वाले व्यापारिक उल्लंघनों को रोकने, खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को गहरा करने का माध्यम भी बनेगी, जिससे दोनों देशों के आर्थिक व कूटनीतिक हित लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे।

