मुंबई, (वार्ता) महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री नरहरी जिरवाल ने पुणे के रंजनगांव स्थित एक प्रमुख रसायनिक कंपनी के खिलाफ एफडीए के आयुक्त एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंडे की ओर से जारी दंडात्मक आदेश पर रोक लगा दी।
पुणे में जहरीली शराब त्रासदी के बाद, अवैध औद्योगिक मेथनॉल वितरण के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई के तहत श्री मुंडे ने उक्त कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया था। रसायनिक इकाई को दी गयी इस अंतरिम राहत के कारण राज्य प्रशासन और प्रवर्तन अधिकारियों के बीच तीखा टकराव पैदा हो गया है। इस कंपनी के तार कथित तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा ) के एक वरिष्ठ नेता से जुड़े बताए जाते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस सुनवाई की जल्दबाजी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मंत्री के कार्यालय में फार्मास्युटिकल और रसायनिक लाइसेंस से जुड़ी 2,400 से अधिक अपीलें अभी भी लंबित पड़ी हैं। यह टकराव आयुक्त के नेतृत्व में चलाए गए उस बड़े निरीक्षण अभियान से उपजा है, जिसमें अवैध शराब बनाने के लिए मेथनॉल के गलत इस्तेमाल का पर्दाफाश हुआ था।
