तेल अवीव, 01 नवंबर (वार्ता) इजरायल ने ईरान के साथ संभावित नए सैन्य टकराव के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान पर हमले फिर शुरू करने के विकल्प पेश किए हैं। इजरायली समाचार पत्र ‘येदियोत अहरोनोत’ ने यह खबर दी है।
अखबार ने अज्ञात राजनीतिक सूत्रों के हवाले से बताया कि इजरायली सेना ने संभावित रूप से फिर से संघर्ष शुरू होने की स्थिति के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियां पूरी कर ली हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला ट्रंप के हाथ में है, जबकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व एक और दौर की लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन संघर्ष शुरू करने का फैसला उनके नियंत्रण में नहीं है।
इन तैयारियों में इजरायली वायुसेना के बार-बार किए जा रहे अभ्यास शामिल हैं। इन अभ्यासों के दौरान दर्जनों लड़ाकू विमानों और हवाई ईंधन भरने वाले विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र में संभावित उड़ान मार्गों का अभ्यास किया, जो ईरान की ओर जाने वाले रास्तों का अनुकरण करते हैं।
अखबार के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन की मौजूदगी में हुई बैठक में ट्रंप के सामने सैन्य कार्रवाई के विकल्प पेश किए। हालांकि, सैन्य अभियान फिर से शुरू करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य साजो-सामान क्षेत्र में पहुंचाने के अभियान के तहत 10 अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान इजरायल के हवाई अड्डों पर पहुंचे हैं। अखबार ने कहा कि ये घटनाक्रम अमेरिकी सैन्य बलों की लगातार बढ़ती तैनाती और संभावित रूप से फिर से संघर्ष शुरू होने की तैयारियों के बीच सामने आए हैं।
अमेरिका के सामने संभावित सैन्य अभियान के रणनीतिक उद्देश्यों को लेकर अनिश्चितता है। ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल प्रणालियों और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले करने से जरूरी नहीं कि वहां सत्ता या नीतियों में बदलाव हो।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका सैन्य कार्रवाई की धमकी का इस्तेमाल तेहरान पर अमेरिका के लिए अधिक अनुकूल शर्तों पर समझौता करने का दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
सूत्रों ने यह भी कहा कि यदि किसी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और सैन्य विस्तार को लेकर इजरायल की चिंताओं का समाधान नहीं होता है, तो सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे रह जाएंगे।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि हिजबुल्लाह इस संघर्ष में शामिल होता है, तो नया टकराव लेबनान तक फैल सकता है। इससे संघर्ष लंबा खिंचने और इजरायल की वायु रक्षा प्रणालियों तथा मिसाइल अवरोधकों के भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
इस बीच, कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संपर्कों में कथित तौर पर प्रगति हुई है। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत के लिए परिस्थितियां तैयार करना है। अखबार के अनुसार, प्रस्तावित वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान के लिए आर्थिक प्रोत्साहन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। चीन और रूस संभावित रूप से किसी समझौते के गारंटर की भूमिका निभा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के सामने चुनौती केवल संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी करने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि किसी भी अभियान के रणनीतिक उद्देश्य स्पष्ट हों, संघर्ष समाप्त करने की शर्तें तय हों और उसके नतीजे देश के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों के अनुकूल हों।
