हिंदी सिनेमा में कई अभिनेत्रियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने बचपन से ही फिल्मी दुनिया में कदम रखा और अपनी मेहनत के दम पर खास पहचान बनाई। पद्मिनी कोल्हापुरे भी उन्हीं कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने महज सात साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि अभिनय की दुनिया में आने से पहले वह अपनी बहन के साथ फिल्मों में कोरस गाया करती थीं।
पद्मिनी कोल्हापुरे की पहली फिल्म मिलने के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है, जिसमें दिग्गज गायिका आशा भोसले की अहम भूमिका रही। पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जबकि मां अनुपमा एयरलाइन में काम करती थीं। घर में संगीत और कला का माहौल होने के कारण पद्मिनी को बचपन से ही गाने और डांस का शौक था।
बहन के साथ गाती थीं कोरस, ऐसे हुई शुरुआत
पद्मिनी कोल्हापुरे ने अपनी बहन शिवांगी कोल्हापुरे के साथ फिल्मों के गानों में कोरस गाना शुरू किया। ‘यादों की बारात’, ‘किताब’ और ‘दुश्मन दोस्त’ जैसी फिल्मों के गानों में उनकी आवाज शामिल रही। इसी दौरान उनकी मुलाकात आशा भोसले से हुई। रिश्ते में आशा भोसले उनकी बुआ लगती थीं और पद्मिनी उन्हें प्यार से ‘आशा आत्या’ कहती थीं।
आशा भोसले ने देव आनंद से कराई थी मुलाकात
पद्मिनी कोल्हापुरे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आशा भोसले ने ही उन्हें अभिनेता देव आनंद से मिलवाया था। उन्होंने देव आनंद से कहा था कि अगर उनके पास पद्मिनी के लिए कोई काम हो तो उन्हें जरूर मौका दें। आशा भोसले की सिफारिश के बाद देव आनंद ने उन्हें अपनी फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ में काम दिया। इस तरह पद्मिनी को पहली फिल्म मिली और उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई।
प्रेम रोग ने दिलाई बड़ी पहचान
इसके बाद पद्मिनी ने ‘जिंदगी’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। राज कपूर की फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में छोटी रूपा के किरदार से उन्हें पहचान मिली। बाद में राज कपूर ने उन्हें ‘प्रेम रोग’ में मुख्य भूमिका दी, जिसमें वह ऋषि कपूर के साथ नजर आईं। साल 1980 में आई फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। उस वक्त उनकी उम्र महज 15 साल थी। इसके बाद 1982 में ‘प्रेम रोग’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान मिला।
फिल्मों से दूरी के बाद फिर की वापसी
पद्मिनी ने ‘आहिस्ता आहिस्ता’, ‘विधाता’, ‘वो सात दिन’, ‘प्यार झुकता नहीं’ और ‘सौतन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। हिंदी के साथ उन्होंने मराठी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। कुछ समय तक फिल्मों से दूर रहने के बाद उन्होंने वापसी की और ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’, ‘पानीपत’ और ‘प्रवास’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने 1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से शादी की। उनका एक बेटा प्रियंक शर्मा है।
