कोल्हापुर, (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने ‘महायुति’ के उन 12 निदेशकों को दो नवंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है, जो कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (गोकुल) के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान अनुपस्थित थे।
श्री सतेज पाटिल के ‘समविचारी अघाड़ी’ (समान विचारधारा वाले गठबंधन) के 13 निदेशकों ने कल अपने समूह द्वारा अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा किए जाने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था। आज हुई सुनवाई में, अदालत ने ‘कोरम’ (गणपूर्ति) का मुद्दा उठाया, बैठक स्थगित होने के बाद तैयार किए गये मिनट्स (कार्यवाही विवरण) पर सवाल उठाये और निदेशकों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।
अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए ‘कोरम’ का मुद्दा गुरुवार को एक उलझन बन गया, क्योंकि ‘महायुति’ गठबंधन के 12 निदेशकों ने सत्र का बहिष्कार किया और वे बैठक में शामिल नहीं हुए।
हालांकि, बैठक स्थगित होने के बावजूद, कांग्रेस के ‘समविचारी अघाड़ी’ के 13 निदेशकों ने हॉल में ही चुनाव बैठक आयोजित की और शशिकांत आनंदराव पाटिल-चुयेकर को अध्यक्ष चुन लिया। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि ‘गोकुल’ के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 14 निदेशकों के ‘कोरम’ की आवश्यकता नहीं है।
आज, कोल्हापुर सर्किट बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान, अदालत ने ‘कोरम’ का मुद्दा उठाया और बैठक स्थगित होने के बाद लिखे गए मिनट्स पर सवाल उठाए। साथ ही, अदालत ने ‘महायुति’ के उन 12 निदेशकों को भी पेश होने का आदेश दिया, जो बैठक में अनुपस्थित थे।
