भारत के नाविक कॉन्स्टेलेशन और सैन्य निगरानी को मिला बढ़ावा, इसरो ने जीएसएलवी-एफ18 का किया प्रक्षेपण

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), (वार्ता) सीमा की निगरानी को मजबूत करने और सैन्य उद्देश्यों के लिए ‘नाविक’ प्रणाली को सक्रिय करने के एक महत्वपूर्ण मिशन के तहत जीएसएलवी-एफ18 ने नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया।

चौबीस घंटे की सुचारू उल्टी गिनती के बाद शुक्रवारत रात 23:51 बजे दूसरे लॉन्च पैड से उपग्रह ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी और उसे उसकी कक्षा में पहुंच गया।

मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि जीएसएलवी-एफ18/एनवीएस-03 मिशन पूरी तरह सफल रहा। उपग्रह को बिल्कुल सटीक रूप से अंडाकार कक्षा में स्थापित किया गया है। उन्होंने इस मिशन की सफलता के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया। यह मिशन पिछले मिशन जीएसएलवी-एफ17/ईओएस की बड़ी सफलता के लगभग 55 दिन बाद शुरू किया गया था, जो लगातार जरूरी डेटा उपलब्ध करा रहा है। उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद, तीनों चरणों के इग्निशन और अलग होने की प्रक्रिया पूरी हुई।

‘नाविक’ श्रृंखला का यह तीसरा उपग्रह है, जो भारतीय सैन्य जरूरतों के लिए नेविगेशन प्रणाली को सक्रिय करेगा। इसे ‘जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट’ में स्थापित किया गया है, जहां से इसे ऑनबोर्ड मोटरों की मदद से 37,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित इसकी अंतिम ‘जियोस्टेशनरी ऑर्बिट’ (भू-स्थिर कक्षा) तक ले जाया जाएगा। रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘नाविक’ प्रणाली को सक्रिय करने की दिशा में यह एक अहम मिशन है। 2,250 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह को 170 किमी की पेरिगी (पृथ्वी के सबसे करीब की दूरी) और 37,023 किमी की एपोगी (पृथ्वी से सबसे दूर की दूरी) वाली कक्षा में 20.75 डिग्री के झुकाव पर स्थापित किया गया है। इसके बाद, उपग्रह में लगे ‘लिक्विड एपोगी मोटर्स’ को चालू करके इसे इसकी अंतिम ‘जियोस्टेशनरी ऑर्बिट’ तक पहुंचाया जाएगा। वर्तमान में अंतरिक्ष में ‘नाविक’ प्रणाली के तीन उपग्रह काम कर रहे हैं। इनमें पहली पीढ़ी के दो आईआरएनएसएस उपग्रह और एनवीएस-01 उपग्रह शामिल हैं। एक बार जब एनवीएस-03 अपना काम शुरू कर देगा और नाविक कॉन्स्टेलेशन (जिसके लिए कम से कम चार अंतरिक्ष यानों की आवश्यकता होती है) चालू हो जाएगा, तो तेजी से बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों के बीच इससे सैन्य निगरानी को काफी बढ़ावा मिलेगा।

नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (नाविक) भारत की अपनी स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली है। इसे भारत और भारतीय भू-भाग से लगभग 1,500 किमी दूर तक के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक पोजीशन, नेविगेशन और टाइमिंग (पीएनटी) सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यही इसका मुख्य सेवा क्षेत्र है।

एनवीएस-03, दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली (नाविक सीरीज़) का तीसरा उपग्रह है। इसे पहली पीढ़ी की आईआरएनएसएस सीरीज़ की नेविगेशन सेवाओं को निरंतर बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। इस उपग्रह में बाहर से खरीदी गयी एटॉमिक घड़ियों के साथ-साथ स्वदेशी एटॉमिक घड़ी भी लगी है।

इसरो के अनुसार, इसमें मौजूदा एल5/एस सिग्नलों के अलावा एल1 सिग्नल भी शामिल हैं, जो भारतीय भू-भाग और भारत की भौगोलिक सीमाओं के चारों ओर 1,500 किमी तक के क्षेत्र को कवर करते हैं। भारत ने अब तक 11 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, जिनमें से केवल तीन – आईआरएनएसएस-1बी, आईआरएनएसएस-1एल और एनवीएस -01 (जो एल1 बैंड सपोर्ट जोड़ता है) ही ज़रूरी सेवाएं दे रहे हैं। एनवीएस-03 इस क्रम में चौथा सैटेलाइट होगा। एनवीएस-03 के सेवा में आने के बाद इसरो नाविक प्रणाली को सक्रिय कर सकता है।

 

 

 

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