लखनऊ, 30 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की विशेष जांच में चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित कई ब्लड सेंटरों पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
कहीं अनिवार्य एलिसा जांच के स्थान पर रैपिड किट से रक्त की जांच की जा रही थी, तो कहीं खराब डीप फ्रीजर में रक्त घटक रखे मिले। कई केंद्रों पर चिकित्सक और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित थे, इसके बावजूद रक्त संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण का काम जारी था। अनियमितताओं के चलते 14 केंद्रों में रक्त एवं रक्त घटकों से संबंधित सभी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इनमें पहले चरण में कार्रवाई के दायरे में आए सात केंद्रों के बाद अब सात और केंद्रों का संचालन बंद कराया गया है। शेष निरीक्षित केंद्रों में पाई गई कमियों पर कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्ध कराने के साथ ही उचित मूल्य पर रक्त की उपलब्धता के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी विशेष अभियान के तहत अब तक 31 जनपदों के 81 रक्त केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है।
औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीमों द्वारा किए जा रहे निरीक्षण में रक्त की गुणवत्ता, संक्रमण संबंधी अनिवार्य जांच, रक्त घटकों के सुरक्षित भंडारण, कोल्ड चेन, तापमान नियंत्रण, स्टॉक एवं डोनर रजिस्टर, मूल्य निर्धारण और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आई अनियमितताएं बताती हैं कि कुछ केंद्रों पर रक्त सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मानकों की अनदेखी की जा रही थी।
इसी को देखते हुए एफसीडीए ने प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रदेशभर के ब्लड सेंटर्स में विशेष सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त, प्लेटलेट्स व आवश्यक ब्लड कॉम्पोनेंट्स की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाए रखना है। मौजूदा वातावरण के समय डेंगू, मलेरिया समेत अनेक बीमारियों के दृष्टिगत मरीजों को अतिरिक्त रक्त की आवश्यकता पड़ती है और उन्हें उचित मूल्य के साथ सही रक्त उपलब्ध कराना विभाग की प्रतिबद्धता है।
अभियान के तहत लखनऊ में सर्वाधिक 13 रक्त केंद्रों की जांच की गई। आगरा और मुजफ्फरनगर में सात-सात, अलीगढ़, कानपुर और प्रयागराज में पांच-पांच तथा बिजनौर में चार केंद्रों का निरीक्षण हुआ। अमरोहा, गाजियाबाद और गोरखपुर में तीन-तीन केंद्रों की जांच की गई। अयोध्या, आजमगढ़, जौनपुर, लखीमपुर खीरी और वाराणसी में दो-दो केंद्रों का निरीक्षण हुआ। इसके अतिरिक्त बागपत, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कासगंज, कौशांबी, मैनपुरी, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद और संत कबीर नगर में एक-एक रक्त केंद्र की जांच की गई। एफएसडीए ने जिन केंद्रों की गतिविधियों पर रोक लगाई है, वहां उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के मानकों के अनुरूप सुरक्षित निस्तारण के लिए निर्देश दिया गया है। अन्य निरीक्षित केंद्रों में मिली कमियों पर भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विशेष जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा।
विभाग का उद्देश्य केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि रक्त संग्रह से लेकर मरीज तक उसकी आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। रक्तदान किसी जरूरतमंद को जीवन देने का माध्यम है। ऐसे में रक्त केंद्रों की लापरवाही से मरीजों की जान जोखिम में न पड़े, इसके लिए एफएसडीए ने निगरानी और प्रवर्तन की कार्रवाई तेज कर दी है।
