नाम पैनल में थे लेकिन चंबल के माननीयों की “आस” हुई परास

ग्वालियर चंबल डायरी 

हरीश दुबे

इस बार भी पुराना किस्सा दोहराया गया। चंबल के माननीय हाथ मलते रह गए और टिकट बाहर वाले ले गए। पिछले तीन दफा से राज्यसभा के टिकट की कतार में लगे भिण्ड के दो पूर्व मंत्रियों के नाम सत्तारूढ़ दल की कोर कमेटी ने पांच नामों के पैनल में शुमार कर आलाकमान को भेज तो दिए थे लेकिन इन पूर्व मंत्रियों को शुरू से ही डर सता रहा था कि कहीं इस बार भी उनकी दावेदारी पर राष्ट्रीय स्तर के समीकरण और चुनावी राज्यों को संतुष्ट करने की कवायद भारी न पड़े। जिससे डरते थे, वही बात हो गई। सूबाई सरकारों में बरसों तक मिनिस्टर रहे संघ पृष्ठभूमि के अरविंद भदौरिया और लालसिंह आर्य को इस बार भी दिल्ली का टिकट नहीं मिला। उनकी दावेदारी को दरकिनार कर टिकट पंजाब के हरदीप पुरी को दे दिया गया जो अभी सेंट्रल में मिनिस्टर हैं। बहरहाल, पार्टी ने पहले से ही अरविंद को आंध्र और आर्य को बंगाल में संगठन के प्रभारी और सह प्रभारी की जिम्मेदारी दे रखी है लेकिन दोनों की राज्यसभा जाने की पुरानी आस है जो इस बार भी परास हो गई। भिंड वाले कह सकते हैं “घर का जोगी जोगना, आन गांव का सिद्ध।” लेकिन पार्टी की भी अपनी मजबूरियां होती हैं, पंजाब में चुनाव जो हैं।

वक्त ने दर्द दिया, सब्र भी सिखाया

अब यह फाइनली मान लिया गया है कि कभी सूबे की सत्ता और संगठन के फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा कमल दल के कोर ग्रुप से बाहर हो चुके हैं। लगातार दूसरी बार उन्हें कोर ग्रुप की बैठक का न्यौता नहीं मिला। छह बार विधायक, तीन बार मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा लगातार पंद्रह साल तक प्रदेश के शीर्ष नेताओं में गिने जाते रहे हैं। 23 के विधानसभा चुनाव में तो उन्हें पार्टी का कुनबा बढ़ाने वाली टोली का अगुआ बनाया गया था। सरकार के प्रवक्ता भी रहे। इन बड़ी जिम्मेदारियों को निभाते वक्त उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें वक्त का यह सितम भी झेलना होगा। उफ़ करने के बजाए नरोत्तम इस लाइन पर चल रहे हैं – “हर टूटते ख्वाब ने सच दिखाया, वक्त ने दर्द दिया, सब्र भी सिखाया।”

रैली दिल्ली में, प्रेशर ग्वालियर पर

जब भी दिल्ली में किसी बड़ी रैली का कॉल होता है, ग्वालियर पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है। रामलीला मैदान में चाहे पंजा मजबूत करने का सवाल हो अथवा कमल खिलाने का, या फिर साइकिल चलाने का, रैलियों में ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने के लिए बड़े नेता ग्वालियर चंबल पर ही टकटकी लगा लेते हैं। एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस फिर बड़ी रैली कर रही है और इसके लिए ग्वालियर चंबल को बड़ा टारगेट मिला है। ग्वालियर के नेताओं ने फिलहाल एक से डेढ़ हजार कार्यकर्ताओं की ही हामी भरी है। पूरे चंबल को जोड़ दें तो करीब पांच से छह हजार तक पर आंकड़ा पहुंच रहा है। ज्यादातर बड़े नेता अपने साधनों या ट्रेन से जाएंगे लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए बसों का इंतजाम भी किया जा रहा है। हर बस के साथ एक बड़ा नेता रहेगा तो ग्वालियर वालों के लिए दिल्ली में भोजन पानी का इंतजाम अशोक सिंह ने अपने बंगले पर रखा है। दिल्ली से आए एआईसीसी ऑब्जर्बर ने कांग्रेस भवन पर मीटिंग ली तो पुराने कार्यकर्ताओं को दिग्विजय दौर में परिवहन मंत्री रहे हरवंश सिंह याद आए जो ऐसी किसी भी रैली से पहले ग्वालियर आकर बस ऑपरेटरों को टाइट कर देते थे और फिर मुफ़्त की बस देने के अलावा रास्ते की व्यवस्थाएं भी यही बस ऑपरेटर संभालते थे। अब पार्टी विपक्ष में बैठी है और बस ऑपरेटर हाथ नहीं धरने दे रहे। “वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था, अब इत्र भी लगा लूँ तो आती नही खुशबू!”

पूछ रहे “क्या हम पर भरोसा नहीं था”

एक ओर कांग्रेस दिल्ली रैली की तैयारी में जुटी है वहीं भाजपा के कार्यकर्ता अभी तक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि कांग्रेस की रैली के जवाब में उनकी पार्टी सूबे के चारों राजभोगी शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में पहली तारीख को लक्खी भीड़ वाली जो रैलियां करने जा रही थी, उसके शिड्यूल में से अचानक ग्वालियर कट क्यों कर दिया गया। यानि, अब ये रैलियां सिर्फ भोपाल, इंदौर और जबलपुर में ही होंगी, ग्वालियर को ना कह दिया गया है। रैली की तैयारी में जुटे भगवाधारी मायूश हैं, हालांकि अब कहा जा रहा है कि सूबे के बाकी तीनों शहरों में एक-एक लाख की तादाद वाली रैलियां होंगी लेकिन ग्वालियर वाले अपने स्तर पर प्रदेश के अन्य शहरों की तर्ज पर भीड़ के मापदंड से मुक्त छोटी रैलियां कर सकते हैं। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या ग्वालियर वालों की सामर्थ्य पर पार्टी को भरोसा नहीं था…!

ऐसा पहली बार, एक हफ्ते में तीन एसपी

ऐसा पहली-पहली बार हुआ, जब एक ही हफ्ते में ग्वालियर को तीन एसपी मिले हैं। कानाफूसी पर यकीं करें तो अब चौथे एसपी का इंतजार किया जा रहा है। दरअसल, अक्टूबर का आखिरी हफ्ता शुरू होते ही एसपी धर्मवीर सिंह ट्रेनिंग पर चले गए, एएसपी जयराज कुबेर को चार्ज मिला। इसी रोज एसएएफ के कमांडेंट संजीव सिन्हा को प्रभारी एसपी बना दिया गया, उन्होंने भी चार्ज ले लिया। ग्वालियर में चार्ज लेने के कुछ ही घंटों के भीतर सिन्हा को सागर एसपी बनाए जाने का हुक्मनामा आ गया, अब जयराज फिर प्रभारी एसपी बन गए हैं। हालांकि धर्मवीर ट्रेनिंग पर गए हैं लेकिन चर्चा तो यही है कि ग्वालियर के लिए नया एसपी तलाशा जा रहा है।

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