इंदौर: मंगलवार को इंदौर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बोरिंग करने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी हो गए हैं. उक्त आदेश इंदौर जिले में औसत से कम बारिश होने ओर जमीनी जल स्तर के बहुत ज्यादा दोहन करने के तहत जारी किया गया है. उक्त आदेश आज से ही लागू हो गया है.
कलेक्टर शिवम वर्मा ने आज इंदौर जिले में बोरिंग करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. उक्त प्रतिबंध आज से ही लागू हो गया. इस साल इंदौर जिले सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के सभी जिलों में औसत से बहुत कम बारिश हुई है. कम बारिश के चलते जमीनी जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. साथ ही बहुत कम वर्षा होने और भू-जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे पेयजल स्रोतों एवं नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है.
आने वाले समय में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने इंदौर जिले के संपूर्ण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है. साथ ही, मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 एवं संशोधन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत जिले में अशासकीय एवं निजी नलकूप खनन पर आज से आगामी आदेश तक प्रतिबंध लगाया गया दिया है. कलेक्टर ने बोरिंग पर प्रतिबंध लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी कार्यपालन यंत्री,जल प्रदाय, नगर निगम एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, ग्रामीण द्वारा निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा पर लगाया है.
मशीनों को किया जाएगा जब्त
आदेश में प्रतिबंधित स्थानों पर अवैध रूप से प्रवेश करने वाली अथवा नलकूप खनन एवं बोरिंग का प्रयास करने वाले एवं मशीनों को जब्त किया जाएगा. संबंधित राजस्व, पुलिस एवं नगर निगम अधिकारियों को मशीनें जप्त करने और कार्रवाई कराने का अधिकार दिया गया है. मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 2 हजार रुपए तक जुर्माना और दो वर्ष के कारावास या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है. साथ ही शासकीय योजनाओं के लिए नलकूप उत्खनन पर छूट रहेगी. कलेक्टर वर्मा ने आदेश में कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर निजी जलकूपों एवं अन्य विद्यमान निजी जल स्रोतों का सार्वजनिक पेयजल के लिए अधिग्रहण किया जाएगा. उक्त आदेश आज से प्रभावशील हो गया है
