
जबलपुर। उच्च न्यायालय ने परमानंद गुजराती एवं अन्य के द्वारा दायर याचिका में सुनवाई करते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2024 से जुड़ी नियम पुस्तिका के एक प्रावधान के संबंध में जबाब तलब किया है।
याचिकाकर्ताओं के द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), 2024 के विज्ञापन में शामिल उस शर्त को चुनौती दी गई थी, जिसमें केवल शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थियों को ही परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्र माना गया था । याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक वाग्रेचा एवं विशाल बघेल ने तर्क प्रस्तुत किया कि विज्ञापन की यह शर्त एनसीटीई के दिशानिर्देश एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ओमकार सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य के मामले में दिए गए फैसले के विपरीत है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार “अध्ययनरत” शब्द का अर्थ है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया है और वह पढ़ाई कर रहा है, तो वह वर्ष की बाध्यता के बिना पात्रता परीक्षा में शामिल होने का हकदार है । न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने दलीलों को सुनने के बाद राज्य सरकार एवं कर्मचारी चयन आयोग को आगामी सुनवाई की तिथि तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, साथ ही न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए यह आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को विज्ञापन की उक्त शर्त के आधार पर अयोग्य घोषित न किया जाए। यह व्यवस्था इस याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को नियत की गई है ।
