
ग्वालियर। उरांव एवं अन्य आदिवासी समाज समिति की ओर से मानस भवन, फूलबाग में करमा महोत्सव पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बैगा रघुवीर भगत ने करमा वृक्ष की टहनियों की परंपरागत विधि से पूजा-अर्चना कराई और पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा सुनाई। इसके बाद समाज के लोगों ने घंट, मांदर और नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीत गाए और नृत्य कर अपने आराध्य देव को प्रसन्न किया। महोत्सव के समापन पर करमा वृक्ष की टहनियों का रमौआ बांध में विसर्जन किया गया। समिति के सचिव रामेश्वर राम पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज प्राचीनकाल से ही प्रकृति का उपासक रहा है।
नदी, नाले, जंगल और पेड़-पौधे आदिवासी संस्कृति एवं जीवनशैली के अभिन्न अंग हैं। करमा पर्व भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। इस अवसर पर अविवाहित युवतियां उत्तम वर की कामना के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए करमा वृक्ष के नीचे तपस्या की थी। इसी मान्यता के चलते उरांव समाज में आदिकाल से करमा पर्व मनाया जाता रहा है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, पारिवारिक संबंधों की मजबूती और सामाजिक एकता का संदेश देता है। कार्यक्रम में समिति के संरक्षक महेशराम भगत, अध्यक्ष जगपति भगत, उपाध्यक्ष चनमन राम भगत और कोषाध्यक्ष जतरू राम भगत सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर सचिव रामेश्वर राम पटेल ने संरक्षक महेशराम भगत, अध्यक्ष जगपति भगत, उपाध्यक्ष चनमन राम भगत, कोषाध्यक्ष जतरू राम भगत, महावीर राम भगत, सुखदेव राम भगत, वोलवा राम भगत, देवचरण राम भगत, विजय राम भगत, नंदलाल राम भगत, पतरू राम भगत, महादेव राम भगत, लच्छू राम तिर्की, शंकर राम भगत, जगमोहन राम भगत और विजेंद्र भगत का अभिनंदन किया। वहीं, करमा देव का स्वागत गेंदो भगत, पार्वती पटेल, शारदा भगत, उर्मिला भगत, मनमती भगत, लालमंती भगत और जिरमाईत भगत सहित अन्य महिलाओं ने किया। कार्यक्रम का संचालन समिति के सचिव रामेश्वर राम पटेल ने किया।
