नई दिल्ली 25 अक्टूबर (वार्ता) आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ विक्रांत भूरिया ने जेल में बंद 24 वर्षीय दिव्या से मुलाकात कर उनके मामले में गंभीर सवाल उठाए। केन-बेतवा परियोजना से जुड़े मुद्दों पर आदिवासियों और दलितों की आवाज उठाने वाली दिव्या को जेल में रखे जाने और जेल ले जाते समय मेडिकल प्रक्रिया में लापरवाही और उनके कपड़े फाड़े जाने संबंधी आरोपों पर उन्होंने चिंता जताई। श्री भूरिया ने कहा कि एक तरफ नवरात्र में बेटियों को मां के रूप में पूजने की परंपरा निभाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली 24 वर्षीय युवती के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्या के मामले में मेडिकल प्रक्रिया के दौरान लापरवाही और कपड़े फाड़े जाने के आरोप गंभीर हैं तथा इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला महिलाओं की गरिमा, आदिवासी-दलित समुदायों के अधिकारों और पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। ऐसे मामलों में कानून का पालन करने के साथ-साथ व्यक्ति की गरिमा और मौलिक अधिकारों की रक्षा करना भी आवश्यक है।
श्री भूरिया ने मांग की कि दिव्या के मामले में सामने आए सभी आरोपों, मेडिकल प्रक्रिया और संबंधित घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि मेडिकल अभिलेखों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा दुर्व्यवहार प्रमाणित होता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी-दलित समुदायों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनके अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

