
ग्वालियर। कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच लोगों की मेहनत की कमाई पर भारी पड़ रहा है। साइबर ठग अब ओटीपी और फर्जी लिंक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन निवेश एप और वेबसाइट के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन निश्चित कमाई, कुछ ही दिनों में रकम कई गुना करने और दूसरों को जोड़कर कमीशन पाने जैसे आकर्षक प्रस्ताव दिए जाते हैं। शुरुआत में छोटी रकम पर भुगतान कर निवेशकों का भरोसा जीता जाता है, फिर बड़ी रकम जमा होने के बाद एप या वेबसाइट बंद कर दी जाती है।
पहले भरोसा, फिर बड़ी रकम पर निशाना……..
ऑनलाइन निवेश ठगी में पहले कम रकम जमा कराकर आकर्षक रिटर्न दिखाया जाता है। कई बार शुरुआती भुगतान भी किया जाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। इसके बाद अधिक निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। भरोसा होने पर लोग अपनी बचत और उधार की रकम तक लगा देते हैं। बाद में भुगतान रोककर तकनीकी समस्या का बहाना बनाया जाता है और अंततः प्लेटफॉर्म बंद हो जाता है, जिससे निवेशकों की रकम फंस जाती है।
₹27 हजार जमा किए, रोजाना ₹900 मिलने का दावा
हरिओम कुशवाह ने बताया कि उन्होंने आईएचजी (IHG) एप पर 27 हजार रुपये जमा किए थे। उन्हें रोजाना 900 रुपये देने का दावा किया गया था। शुरुआत में कुछ दिनों तक भुगतान मिला, जिससे भरोसा बढ़ गया। लेकिन कुछ दिन बाद एप बंद हो गया और उनकी जमा रकम फंस गई। उनके अनुसार, शुरुआती भुगतान के कारण उन्हें योजना के संदिग्ध होने का अंदाजा नहीं हुआ।
₹9 हजार का निवेश, भुगतान के बाद वेबसाइट बंद
राहुल ने बताया कि उन्होंने एक वेबसाइट पर साइनअप कर फोनपे के जरिए 9 हजार रुपये जमा किए थे। उन्हें रोजाना करीब 300 रुपये मिलने का दावा किया गया था। शुरुआती भुगतान से उनका भरोसा बढ़ा। वेबसाइट पर रेफरल का विकल्प भी था, जिसके तहत दूसरे लोगों को जोड़ने पर निवेश की रकम पर 40 प्रतिशत कमीशन देने का दावा किया गया था। बाद में वेबसाइट बंद हो गई और उनकी जमा पूंजी फंस गई।
हरिओम और राहुल ने बताया कि , इस प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों का एक टेलीग्राम ग्रुप भी था। एप बंद होने के बाद ग्रुप में संदेश भेजकर बताया गया कि यह एप छह महीने के लिए शुरू किया गया था और अब इसे पूरी तरह बंद किया जा रहा है। ग्रुप में दो लाख से अधिक सदस्य जुड़े होने की बात कही गई थी। टेलीग्राम ग्रुप में एप संचालित करने वालों की ओर से करीब 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रकम लेकर प्लेटफॉर्म बंद किए जाने संबंधी संदेश प्रसारित किया गया। ग्रुप में मैसेज के माध्यम से बताया गया कि एप अमेरिका से जुड़ा था और भारत में इसे लॉन्च करने का उद्देश्य भारतीय लोगों से पैसा जुटाना था।, फिलहाल हरिओम और राहुल ने एवं उनके साथ अन्य लोगों ने इस एप्लीकेशन एवं ठगी के खिलाफ कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई है.
रेफरल का खेल: निवेश बढ़ाने के लिए बनाया नेटवर्क:
इस तरह की संदिग्ध योजनाओं में रेफरल सिस्टम को लोगों तक पहुंच बढ़ाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। निवेशक को केवल अपना पैसा लगाने तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उसे दूसरे लोगों को भी जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। अधिक निवेश और ज्यादा सदस्य जोड़ने पर बड़े कमीशन का लालच दिया जाता है।
लालच व अधूरी जानकारी बन रहे ठगी के हथियार :
ऑनलाइन निवेश ठगी के पीछे कम समय में अधिक कमाई की चाह और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जरूरत से ज्यादा भरोसा बड़ी वजह हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ग्रुप और आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाया जाता है। फर्जी स्क्रीनशॉट, कथित ग्राहकों के अनुभव, एप पर बढ़ता बैलेंस और शुरुआती भुगतान दिखाकर भरोसा कायम किया जाता है। अतिरिक्त आय की तलाश करने वाले बेरोजगारों से लेकर आर्थिक रूप से सक्षम और अनुभवी लोग भी ऐसे जाल में फंस सकते हैं।
ठगी हो जाए तो तुरंत उठाएं ये कदम :
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी होती है, तो उसे बिना देरी किए अपने बैंक को सूचना देनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। भुगतान की रसीद, बैंक ट्रांजेक्शन आईडी, यूपीआई विवरण, एप या वेबसाइट का पता, मोबाइल नंबर, टेलीग्राम चैट और संबंधित संदेशों के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने चाहिए। ये साक्ष्य जांच में उपयोगी हो सकते हैं। पीड़ित को शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
