
अनूपपुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक को करीब डेढ़ वर्ष के लंबे इंतजार के बाद नियमित कुलपति मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार कुलपति चयन के लिए तीन नामों का पैनल तैयार हो चुका है। इसमें दूसरा नाम हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला के भूगोल विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. देव दत्त शर्मा का है। बताया जा रहा है कि शिक्षा मंत्रालय ने यह पैनल राष्ट्रपति भवन भेज दिया है। विश्वविद्यालय की विज़िटर के रूप में महामहिम राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही नियुक्ति पर अंतिम मुहर लग जाएगी। विश्वविद्यालय गलियारों में चर्चा है कि 25 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच नए कुलपति के नाम की घोषणा हो सकती है, और प्रो. शर्मा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से चल रही है। इसी क्रम में 29 और 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कुलपति पद के अभ्यर्थियों के साथ इंटरेक्शन हुआ था। चयन समिति में पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. प्रकाश बाबू के साथ सदस्य के रूप में प्रो. एन.सी. गौतम और प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल मौजूद थीं। इंटरेक्शन के बाद समिति ने तीन नामों का पैनल तय किया।
*प्रो. देव दत्त शर्मा कर चुके है राजनीतिक बदलाव का भी सामना*
मई 2022 में तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी का संस्थापक कुलपति नियुक्त किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने संघ कार्य को बहुत आगे बढ़ाई। दिसंबर 2022 में प्रदेश में सत्ता बदली और कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद अप्रैल 2023 में एचपीयू की कार्यकारिणी परिषद ने उनका असाधारण अवकाश रद्द कर दिया। संघी होने के कारण कांग्रेस की सरकार ने दबाव डाला तथा जबरदस्ती उनसे इस्तीफा ले लिए और वे अपने मूल विभाग में लौट आए।
*लम्बे समय से संघ के दायित्व में है प्रो शर्मा*
प्रो. देव दत्त शर्मा बहुत लंबे समय से संघ की शाखा लगाते है तथा प्रो. शर्मा राष्ट्रपति (विज़िटर) के नामित सदस्य के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय कोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय नागालैंड, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू और तेजपुर विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं। वे केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति और एनसीईआरटी के सामाजिक विज्ञान पाठ्यचर्या समूह के सदस्य भी रहे। उद्यमिता और रिमोट सेंसिंग के साथ नेशनल एसोसिएशन ऑफ जियोग्राफर्स इंडिया के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। हिमाचल के भाजपा नेता संदीपनी भारद्वाज के नजदीकी भी बताये जाते है।
*प्रखर राष्ट्रवादी होने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं में हर्ष का लहर*
प्रो. देव दत्त शर्मा को संघ विचारधारा के करीब माना जाता है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के विषय पर मुखर वक्ता हैं और दिल्ली, रुड़की समेत कई स्थानों पर संगठन से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं। उनके कुलपति बनने की चर्चा से विश्वविद्यालय से जुड़े स्थानीय स्वयंसेवकों में उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि प्रो. शर्मा जैसे अनुभवी शिक्षाविद् के आने से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक स्थिरता लौटेगी।
*प्रखर शिक्षाविद प्रोफेसर साकेत कुशवाहा का नाम भी पैनल में*
सूत्रों के अनुसार इसी पैनल में ओबीसी समुदाय से लद्दाख विश्वविद्यालय, लेह के वर्तमान कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। 28 अगस्त 1963 को कानपुर देहात के भीमसेन गांव में जन्मे प्रो. कुशवाहा जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री हैं। प्रो. कुशवाहा के पास कुलपति के रूप में लंबा अनुभव है। वे 2014 से 2017 तक ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा और अक्टूबर 2018 से अक्टूबर 2024 तक अरुणाचल प्रदेश के राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। फरवरी 2025 से वे लद्दाख विश्वविद्यालय की कमान संभाल रहे हैं। प्रो. कुशवाहा का परिवार शिक्षा जगत में विशेष पहचान रखता है। उनके पिता प्रो. सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा बीएचयू में भौतिकी के प्रोफेसर थे और रांची विश्वविद्यालय तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति रहे, जबकि उनकी बहन प्रो. निर्मला एस. मौर्य वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर की पहली महिला कुलपति रह चुकी हैं। ऐसे में अनुभव के लिहाज से उन्हें भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
लंबे समय से नियमित कुलपति की प्रतीक्षा कर रहे विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों में यह भी चर्चा है की विवि में ओबीसी समुदाय से अभी तक कोई कुलपति नहीं बना है, ऐसे में इसबार ओबीसी समुदाय से कुलपति बनाया जाये, अब सबकी नजरें अब राष्ट्रपति भवन के फैसले पर टिकी हैं।
