शराबखोरी की दलदल में एक और परीवार तबाह: पति की गई जान,पत्नी पहुंची जेल

सौसर, शराब और नशे की लत किस कदर हंसते-खेलते परिवारों को बर्बादी के कगार पर धकेल देती है, इसका रूह कंपा देने वाला उदाहरण लोधीखेड़ा थाना क्षेत्र के बोरगांव में सामने आया है। जहां एक ओर पति की बेलगाम शराबखोरी ने घर की आर्थिक और मानसिक शांति छीन ली थी, वहीं दूसरी ओर आक्रोश और सामाजिक बदनामी के डर ने पत्नी को ही कातिल बना दिया। बोरगांव वार्ड क्रमांक 12 में हुए इस हत्याकांड ने पूरे अंचल को झकझोर कर रख दिया है।

 *​मेहनत की कमाई पर नशे का साया-* 

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला आशा नेहारे 42 वर्ष सब्जी का ठेला लगाकर दिन-रात मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करती थी। वहीं उसका पति रविन्द्र नेहारे गंभीर रूप से शराब की लत का शिकार हो चुका था। वह न केवल कोई काम-धंधा नहीं करता था, बल्कि पत्नी द्वारा दिनभर पसीना बहाकर सब्जी की दुकान से कमाए गए पैसों को भी चुराकर शराब में उड़ा देता था। इस बात को लेकर घर में रोजाना कलह और विवाद की स्थिति बनती थी। 13 अक्टूबर की दोपहर करीब 1:30 बजे भी रविन्द्र ने गल्ले से पैसे निकालकर शराब पी ली, जिससे तंग आकर आशा का सब्र टूट गया और उसने आवेश में आकर गमछे से पति का गला घोंट दिया।

 *​सामाजिक बदनामी के डर से रची थी बाथरूम हादसे की साजिश-* 

​पति की मौत के बाद जहां एक तरफ अपराधबोध और कानून का शिकंजा था, वहीं दूसरी तरफ समाज व रिश्तेदारों में बदनामी का भारी डर सता रहा था। इसी बदनामी से बचने के लिए आरोपी पत्नी ने तुरंत शातिराना पैंतरा बदला और परिजनों को सूचना दी कि रविन्द्र की मौत बाथरूम में पैर फिसलकर गिरने से हुई है। उसने रिश्तेदारों और पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की, ताकि समाज में पति की हत्यारन कहलाने से बच सके। परिजन भी इसे सामान्य हादसा मान बैठे थे, लेकिन कानून के हाथ अंततः सच तक पहुंच ही गए।

*​पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने तोड़ा झूठ का ताना-बाना-* 

​घटना की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जब शव का पोस्टमार्टम कराया, तो डॉक्टरों की रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि रविन्द्र की मौत गिरने से नहीं, बल्कि मारपीट और गला घोंटने के कारण दम घुटने से हुई है। इसके बाद लोधीखेड़ा पुलिस ने 17 अक्टूबर को धारा 103(1) बीएनएस के तहत हत्या का मामला दर्ज किया। थाना प्रभारी ए.बी. मर्सकोले की टीम ने जब पत्नी आशा से मनोवैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गई और उसने सारा सच उगल दिया।

 *​नशा और आवेश: एक झटके में उजड़ गया पूरा संसार-* 

​इस पूरे घटनाक्रम ने समाज के सामने नशे के गंभीर दुष्प्रभावों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। पति की शराब की लत ने जहां पत्नी को इस कदर हताश किया कि वह हत्या जैसे संगीन अपराध की ओर बढ़ गई, वहीं एक पल के गुस्से ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। पति की सांसें थम गईं और पत्नी सलाखों के पीछे पहुंच गई। यह घटना इस बात की गवाह है कि नशा सिर्फ इंसान का शरीर ही नहीं गलता, बल्कि रिश्तों की मर्यादा और पूरे परिवार के अस्तित्व को भी लील जाता है।

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