बैठक में वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए मांग की गई कि सिंहस्थ 2028 के कार्यों से प्रभावित संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्तियों के वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। मकान, दुकान, निर्माण और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन स्वतंत्र एवं प्रशिक्षित अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से कराने की मांग रखी गई। साथ ही प्रभावित संपत्तियों का निष्पक्ष सीमांकन आरआई, पटवारी और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके पर कराने तथा सीमांकन के दौरान संपत्ति मालिकों को उपस्थित रहने का अवसर देने की बात कही गई।
रजिस्ट्री हो या पट्टे का मकान, पुनर्वास का लाभ मिले
स्थानीय लोगों ने मांग की कि विकास कार्यों के कारण मकान या दुकान हटाए जाने की स्थिति में केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। रजिस्टर्ड संपत्ति, शासकीय पट्टे के मकान और लंबे समय से निवास या व्यवसाय में उपयोग हो रही संपत्तियों के मामलों में लागू विस्थापन एवं पुनर्वास नीति के अनुसार पात्र लोगों को लाभ दिया जाए। किसी भी परिवार को बेघर करने या कारोबार हटाने से पहले वैकल्पिक आवास और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
टंट्या मामा प्रतिमा के सामने मुख्य मार्ग पर भूखंड देने की मांग…
बैठक में प्रभावित स्थानीय परिवारों के लिए ओंकारेश्वर वेलकम गेट के पास टंट्या मामा प्रतिमा से गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर उपलब्ध उपयुक्त भूमि पर 60×90 फीट के भूखंड भूमि स्वामित्व अधिकार सहित आवंटित करने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि प्रभावित परिवारों का सामाजिक जीवन, रोजगार, ग्राहक वर्ग और दैनिक गतिविधियां इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इसलिए उन्हें किसी दूरस्थ स्थान पर बसाने के बजाय मुख्य मार्ग पर ही वैकल्पिक भूमि दी जाए, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास हो सके।
दुकानदारों और किरायेदारों के रोजगार की सुरक्षा जरूरी….
प्रभावित दुकानदारों को पुराने व्यवसाय स्थल के आसपास या उसी मुख्य क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराने की मांग की गई। स्थायी दुकानें या व्यावसायिक परिसर बनने तक अस्थायी दुकान की व्यवस्था की जाए, ताकि परिवारों का रोजगार बंद न हो। भविष्य में बनने वाली स्थायी दुकानों में उन स्थानीय दुकानदारों को प्राथमिकता दी जाए, जिनकी दुकानें विकास कार्यों के कारण हटाई गई हैं।
निजी भूमि पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे किरायेदार दुकानदारों के पुनर्वास की भी मांग रखी गई। उन्हें वैकल्पिक दुकान या भूखंड आवंटन में प्राथमिकता देने के साथ यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि भूमि मालिक किराया बढ़ाने, अतिरिक्त पगड़ी या प्रीमियम और नई शर्तों के माध्यम से उन पर अनुचित आर्थिक बोझ न डालें। पुराने स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों पर आधारित व्यवसाय करने वाले परिवारों को भी आवास, भूमि और दुकान आवंटन में प्राथमिकता देने की मांग की गई।
मुआवजे में आजीविका का नुकसान भी जुड़े..
स्थानीय लोगों ने कहा कि मुआवजा तय करते समय केवल जमीन या भवन का मूल्य नहीं, बल्कि दुकान हटने से होने वाले रोजगार और आजीविका के नुकसान को भी ध्यान में रखा जाए। किसी भी मकान या दुकान को हटाने से पहले संबंधित परिवारों और दुकानदारों के साथ बैठक कर प्रस्तावित योजना, प्रभावित क्षेत्र, मुआवजे और पुनर्वास की पूरी जानकारी दी जाए। प्रभावित लोगों की आपत्तियों और सुझावों को रिकॉर्ड में लेकर उनका उचित निराकरण किया जाए।
लिखित योजना, दस्तावेजों के लिए समय और पारदर्शिता की मांग…
बैठक में मांग की गई कि प्रभावित लोगों को रजिस्ट्री, पट्टा, नगर परिषद के कर अभिलेख, बिजली कनेक्शन, नल कनेक्शन और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। प्रशासन सभी प्रभावित परिवारों और दुकानदारों की सूची तैयार कर प्रत्येक व्यक्ति के मुआवजे, वैकल्पिक भूखंड, आवास, दुकान और पुनर्वास का स्पष्ट लिखित विवरण जारी करे। पर्याप्त समय दिए बिना किसी का मकान या दुकान नहीं हटाई जाए। लोगों को सामान स्थानांतरित करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए व्यावहारिक समय देना भी जरूरी है।
विकास के साथ स्थानीय लोगों के हितों का संरक्षण….
बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि ओंकारेश्वर प्राचीन धार्मिक नगरी है और यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तीर्थयात्रियों से जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए, लेकिन इसके साथ स्थानीय परिवारों के आवास, व्यवसाय, सामाजिक संबंधों और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। सभी ने मांगों पर प्रशासन से स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सुरक्षा की मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो नगर बंद कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और आगे की आंदोलनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
