विद्याशंकर राय
लखनऊ, 17 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय हॉकी टीम के मुख्य चयनकर्ता और उत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि खिलाड़ियों को लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभव देना और बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करना जरूरी है। राष्ट्रीय शिविरों और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के माध्यम से खिलाड़ियों की क्षमता को बेहतर बनाने तथा टीम संयोजन को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आरपी सिंह ने ‘यूनीवार्ता’ से विशेष बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। सिंह के कार्यकाल में भारतीय हॉकी ने एशियाई स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है। पुरुष और महिला टीमों के साथ जूनियर वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
हालांकि, विश्व स्तर पर इन सफलताओं को पदकों में बदलना अब भी भारतीय हॉकी के सामने बड़ी चुनौती है। जापान में आयोजित 20वें एशियाई खेलों के बाद डॉ. सिंह ने भारतीय टीमों के प्रदर्शन, खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया और भविष्य की तैयारियों पर विस्तार से बातचीत की।
डॉ. सिंह ने कहा कि चयन समिति का प्रयास मौजूदा प्रदर्शन, फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर सर्वश्रेष्ठ टीम संयोजन तैयार करना है। सीनियर टीमों के साथ जूनियर और अंडर-18 वर्ग में प्रतिभाओं को निखारने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भविष्य के लिए मजबूत खिलाड़ी तैयार किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी ने पिछले कुछ वर्षों में एशियाई प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। उपलब्धियों में 19वें एशियाई खेलों में पुरुष टीम का स्वर्ण और महिला टीम का कांस्य पदक शामिल है। डा सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में पुरुष टीम ने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता, जबकि रांची में आयोजित महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीता। इसके बाद टीम ने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भी खिताबी सफलता हासिल की। वर्ष 2025 में राजगीर में आयोजित एशिया कप में पुरुष टीम चैंपियन बनी, जबकि 31वें सुल्तान अजलान शाह कप में उसे रजत पदक मिला।
आरपी सिंह ने कहा कि महिला टीम ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। वर्ष 2024 में राजगीर में आयोजित महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारत ने खिताब जीता। वर्ष 2025 के महिला एशिया कप में टीम उपविजेता रही, जबकि 2026 में एफआईएच महिला नेशंस कप में भारतीय टीम ने पहला स्थान हासिल किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी के लिए जूनियर वर्ग का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा है। वर्ष 2026 में चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप में भारतीय पुरुष और महिला, दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीता। काकामीगाहारा में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में पुरुष टीम चैंपियन बनी, जबकि महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में तमिलनाडु में आयोजित एफआईएच पुरुष जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता। सुल्तान जोहोर कप में जूनियर टीम उपविजेता रही। इससे पहले 2024 और 2023 में भी टीम ने क्रमशः कांस्य पदक और तीसरा स्थान हासिल किया था। वर्ष 2024 में मस्कट में आयोजित जूनियर एशिया कप में भारतीय पुरुष और महिला, दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीता था।
हॉकी के फाइव-ए-साइड प्रारूप में भी भारतीय टीमों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वर्ष 2026 में आयोजित एशियाई हॉकी फाइव-ए-साइड प्रतियोगिता में पुरुष टीम विजेता बनी, जबकि महिला टीम उपविजेता रही। वर्ष 2024 में एफआईएच फाइव-ए-साइड महिला विश्व कप में भारतीय महिला टीम ने रजत पदक हासिल किया था।
डा सिंह ने कहा कि एशियाई प्रतियोगिताओं में लगातार मिल रही सफलता के बावजूद विश्व स्तर पर भारतीय टीमों को अभी लंबा सफर तय करना है। वर्ष 2026 के एफआईएच हॉकी विश्व कप में पुरुष टीम आठवें और महिला टीम पांचवें स्थान पर रही। ऐसे में चयन समिति के सामने एशियाई स्तर के प्रदर्शन को विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाली सफलता में बदलने की चुनौती है।
गौरतलब है कि डॉ. आरपी सिंह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 1986 के सोल और 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों के अलावा 1989 एशिया कप तथा 1986 और 1990 के विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह 1988 के प्री-ओलंपिक और सुल्तान अजलान शाह कप की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य भी रहे।
प्रशासक के रूप में भी इनका अनुभव रहा है। उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिनमें 2016 का लखनऊ जूनियर हॉकी विश्व कप और 2019 की भारत-फ्रांस महिला हॉकी टेस्ट श्रृंखला प्रमुख हैं।
